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President Murmu Approves 125-Day Employment Guarantee Law, Opposition Flags Implementation Concerns

President Murmu Gives Assent to New Employment Bill; Opposition Raises Questions

125 Day Employment Guarantee Law को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अहम विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है, जिसके बाद यह कानून बन गया है। नए कानून का उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी देना है, हालांकि विपक्ष ने इसके क्रियान्वयन और वित्तीय असर को लेकर सवाल उठाए हैं।


नया कानून क्या कहता है?

इस कानून के तहत अब सरकार की ओर से तय योजना में शामिल पात्र परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 125 दिन का रोजगार देना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। पहले रोजगार के दिनों की संख्या नीतिगत फैसलों और बजट पर निर्भर रहती थी, लेकिन अब इसे कानून का रूप दे दिया गया है।

सरकार का कहना है कि इससे रोजगार को लेकर अनिश्चितता खत्म होगी और गरीब व श्रमिक वर्ग को स्थायी सुरक्षा मिलेगी।


कानून लाने की जरूरत क्यों पड़ी?

पिछले कुछ वर्षों में महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक दबाव के चलते रोजगार की मांग लगातार बढ़ी है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों से शहरों की ओर पलायन भी एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है।
विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों की लंबे समय से मांग थी कि रोजगार योजनाओं को मजबूत कानूनी आधार दिया जाए, ताकि जरूरतमंदों को समय पर काम और मजदूरी मिल सके।

इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने 125 दिनों की वैधानिक गारंटी वाला यह कानून लाया।


सरकार का पक्ष: “गरीबों के लिए मजबूत सुरक्षा कवच”

सरकार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद कहा कि यह कानून गरीब, मजदूर और कमजोर वर्ग के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित होगा।
सरकारी बयान के मुताबिक:

  • इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी

  • लोगों की आय बढ़ेगी

  • स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलेगी

सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि डिजिटल निगरानी, पारदर्शी भुगतान व्यवस्था और सीधे बैंक खातों में मजदूरी भेजने की प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा।


विपक्ष की आपत्ति: “कागज़ पर कानून, ज़मीन पर सवाल”

विपक्षी दलों ने कानून के उद्देश्य का समर्थन करते हुए भी इसके व्यावहारिक पक्ष पर सवाल खड़े किए हैं।
उनका कहना है कि:

  • कई जगह पहले से ही मजदूरी भुगतान में देरी होती है

  • काम की उपलब्धता सीमित रहती है

  • प्रशासनिक ढांचे पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा

विपक्ष का आरोप है कि अगर पर्याप्त बजट और संसाधन नहीं दिए गए, तो 125 दिन की गारंटी सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह जाएगी।


आर्थिक असर और बजट पर दबाव

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह कानून अल्पकाल में रोजगार और मांग को बढ़ा सकता है, जिससे बाजार में पैसा आएगा।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर रोजगार को उत्पादक कार्यों से नहीं जोड़ा गया, तो इससे सरकारी खर्च बढ़ सकता है।

उनका सुझाव है कि रोजगार योजनाओं के तहत:

  • टिकाऊ संपत्तियों का निर्माण हो

  • सिंचाई, सड़क और जल संरक्षण जैसे कार्य कराए जाएं

  • कौशल विकास को भी जोड़ा जाए


क्रियान्वयन सबसे बड़ी चुनौती

कानून बनने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती इसके सफल क्रियान्वयन की है।
विशेषज्ञों के अनुसार इन बातों पर खास ध्यान देना होगा:

  • समय पर काम उपलब्ध कराना

  • मजदूरी भुगतान में देरी न हो

  • शिकायत निवारण तंत्र मजबूत हो

  • केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय हो

राज्य सरकारों की भूमिका इस कानून की सफलता में अहम मानी जा रही है।


लाभार्थियों के लिए क्या बदलेगा?

नए कानून से पात्र परिवारों को अब रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी।
इसका मतलब यह है कि अगर तय समय में काम नहीं दिया जाता, तो लाभार्थी इसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मजदूरों और सामाजिक संगठनों ने इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि असली परीक्षा कानून के लागू होने के बाद होगी।


राजनीतिक और सामाजिक असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कानून आने वाले समय में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।
सरकार इसे अपनी जन-कल्याणकारी नीतियों की उपलब्धि के रूप में पेश करेगी, जबकि विपक्ष इसके क्रियान्वयन में खामियां उजागर करने की कोशिश करेगा।

सामाजिक स्तर पर यह कानून रोजगार और सम्मान से जुड़े अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।


निष्कर्ष

राष्ट्रपति मुर्मू की मंजूरी के बाद 125 दिनों की वैधानिक रोजगार गारंटी वाला यह कानून लागू हो चुका है। सरकार इसे ऐतिहासिक सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष और विशेषज्ञ इसके सफल क्रियान्वयन को लेकर सतर्क रहने की बात कह रहे हैं।

आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि यह कानून ज़मीन पर कितनी मजबूती से लागू होता है और क्या यह वास्तव में लाखों जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला पाता है या नहीं।

Jai Mithila

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