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Vishwakarma Puja 2026: ज़रूर जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Vishwakarma Puja 2026: केवल एक पूजा नहीं, बल्कि भारत के निर्माण की परंपरा का उत्सव
जब भी किसी नई मशीन का उद्घाटन होता है, कोई नया कारखाना शुरू होता है, कोई इंजीनियर नया पुल बनाता है या कोई कारीगर अपने औजारों को प्रणाम करता है, तब कहीं न कहीं भगवान विश्वकर्मा की परंपरा जीवित दिखाई देती है।
विश्वकर्मा पूजा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि कौशल, तकनीक, श्रम और सृजन का सम्मान करने वाला भारतीय संस्कृति का अनोखा उत्सव है। यही कारण है कि इस दिन फैक्ट्री, उद्योग, गैरेज, प्रिंटिंग प्रेस, वर्कशॉप, निर्माण स्थल, आईटी कंपनियाँ, तकनीकी संस्थान और छोटे-बड़े व्यवसायों में भी विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है।
यदि आप Vishwakarma Puja 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, भगवान विश्वकर्मा की कथा, धार्मिक महत्व और बिहार-मिथिला की परंपराओं के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए संपूर्ण मार्गदर्शिका है।
इस विस्तृत लेख में आप जानेंगे—
विश्वकर्मा पूजा 2026 कब है?
भगवान विश्वकर्मा कौन हैं?
मशीनों और औजारों की पूजा क्यों की जाती है?
पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
संपूर्ण पूजा विधि
उद्योगों और फैक्ट्रियों में पूजा कैसे होती है?
मिथिला और बिहार में विश्वकर्मा पूजा की परंपरा
विद्यार्थियों और इंजीनियरों के लिए इसका महत्व
FAQ और उपयोगी जानकारी
भगवान विश्वकर्मा कौन हैं?
हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का प्रथम अभियंता (Divine Architect) और देवताओं के शिल्पकार के रूप में सम्मान दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उन्होंने अनेक दिव्य नगरों, महलों, रथों और अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया।
विश्वकर्मा जी को निर्माण, वास्तुकला, इंजीनियरिंग, धातु कला, बढ़ईगिरी, मशीन निर्माण और तकनीकी कौशल का अधिष्ठाता देव माना जाता है। इसलिए देशभर के इंजीनियर, मैकेनिक, कारीगर, तकनीशियन, वास्तुकार, उद्योगपति और श्रमिक इस दिन उनकी विशेष पूजा करते हैं।
आज के आधुनिक युग में भी जब नई तकनीक, उद्योग और मशीनें विकसित हो रही हैं, तब भगवान विश्वकर्मा का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक दिखाई देता है—कौशल का सम्मान करें, ईमानदारी से कार्य करें और समाज के विकास में अपना योगदान दें।
Vishwakarma Puja 2026 कब है?
विश्वकर्मा पूजा हर वर्ष कन्या संक्रांति के अवसर पर मनाई जाती है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा के साथ-साथ कार्यस्थल, मशीनों, औजारों, वाहनों और तकनीकी उपकरणों की भी विधि-विधान से पूजा की जाती है।
देश के विभिन्न राज्यों में इस दिन कई उद्योगों और कार्यस्थलों पर मशीनों को एक दिन के लिए बंद रखा जाता है और उनकी साफ-सफाई करके विशेष पूजा की जाती है।
नोट: लेख प्रकाशित करने से पहले 2026 की अंतिम तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त प्रमाणिक पंचांग से अवश्य सत्यापित करें।
विश्वकर्मा पूजा का धार्मिक और सामाजिक महत्व
विश्वकर्मा पूजा हमें यह सिखाती है कि केवल पूजा ही नहीं, बल्कि अपने कार्य, औजार और कौशल का सम्मान करना भी एक प्रकार की उपासना है।
यह पर्व हमें प्रेरित करता है—
अपने काम को पूरी ईमानदारी से करें।
मशीनों और उपकरणों का सम्मान करें।
कार्यस्थल पर सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
श्रमिकों और कारीगरों के योगदान का सम्मान करें।
नई तकनीक का उपयोग समाज के विकास के लिए करें।
यही कारण है कि विश्वकर्मा पूजा आज केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत के औद्योगिक और तकनीकी विकास का भी प्रतीक बन चुकी है।
Vishwakarma Puja 2026 पूजा सामग्री
भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र
कलश
रोली और अक्षत
चंदन
धूप और दीप
पुष्प और माला
नारियल
फल
मिठाई
पंचामृत
अगरबत्ती
कलावा
औजार और मशीनें
वाहन
नए वस्त्र (यदि परंपरा हो)
भगवान विश्वकर्मा की पौराणिक कथा
भगवान विश्वकर्मा को हिंदू धर्म में देवताओं के दिव्य शिल्पकार और सृष्टि के प्रथम अभियंता (Divine Architect) के रूप में सम्मान दिया जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार उन्होंने अनेक दिव्य नगरों, महलों, अस्त्र-शस्त्रों और रथों का निर्माण किया। उनकी कला, बुद्धिमत्ता और अद्भुत शिल्पकला के कारण उन्हें वास्तुकला, इंजीनियरिंग, निर्माण कार्य और तकनीकी कौशल का अधिष्ठाता देव माना जाता है।
मान्यता है कि जब देवताओं को किसी अद्भुत भवन, नगर या दिव्य अस्त्र की आवश्यकता होती थी, तब भगवान विश्वकर्मा ही उसका निर्माण करते थे। उनका प्रत्येक निर्माण केवल सुंदर ही नहीं, बल्कि अद्भुत तकनीकी कौशल का भी प्रतीक माना जाता है।
भगवान विश्वकर्मा ने कौन-कौन से दिव्य निर्माण किए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ने अनेक अद्भुत रचनाएँ कीं, जिनका उल्लेख विभिन्न ग्रंथों में मिलता है।
स्वर्गलोक का निर्माण
कहा जाता है कि भगवान इंद्र का भव्य स्वर्गलोक भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाया था। स्वर्णिम महल, सुंदर उद्यान, विशाल सभागार और दिव्य वास्तुकला उनकी अद्वितीय कला का उदाहरण माने जाते हैं।
सोने की लंका
रामायण के अनुसार स्वर्ण नगरी लंका का निर्माण भी भगवान विश्वकर्मा ने किया था। बाद में यह नगरी कुबेर को मिली और फिर रावण ने उस पर अधिकार कर लिया। लंका की भव्यता और वास्तुकला का वर्णन आज भी धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।
द्वारका नगरी
भगवान श्रीकृष्ण के लिए समुद्र के बीच बनाई गई द्वारका नगरी भी भगवान विश्वकर्मा की महान रचना मानी जाती है। यह नगर सुरक्षा, सौंदर्य और आधुनिक नगर योजना का अद्भुत उदाहरण बताया गया है।
इंद्रप्रस्थ
महाभारत में वर्णित इंद्रप्रस्थ नगर को भी भगवान विश्वकर्मा की शिल्पकला से जोड़ा जाता है। इसकी योजना, राजमहल और सभा भवन अत्यंत आकर्षक बताए गए हैं।
सुदर्शन चक्र और दिव्य अस्त्र
मान्यता है कि भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, भगवान शिव का त्रिशूल, इंद्र का वज्र और कई अन्य दिव्य अस्त्र भी भगवान विश्वकर्मा द्वारा निर्मित बताए जाते हैं।
आधुनिक युग में भगवान विश्वकर्मा का महत्व
आज का भारत तेजी से तकनीकी और औद्योगिक विकास की ओर बढ़ रहा है। ऐसे समय में भगवान विश्वकर्मा का महत्व पहले से अधिक बढ़ गया है।
इंजीनियर, आर्किटेक्ट, मैकेनिक, इलेक्ट्रिशियन, वेल्डर, मशीन ऑपरेटर, बढ़ई, प्लंबर, आईटी प्रोफेशनल, डिज़ाइनर और निर्माण कार्य से जुड़े लाखों लोग भगवान विश्वकर्मा को अपने आराध्य देव मानते हैं।
विश्वकर्मा पूजा हमें यह संदेश देती है कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि कुशल हाथों और ईमानदार मेहनत से होती है।
विश्वकर्मा पूजा 2026 की संपूर्ण पूजा विधि
विश्वकर्मा पूजा के दिन पूजा केवल भगवान की नहीं, बल्कि अपने कार्य, औजारों और मशीनों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का भी अवसर होता है।
1. कार्यस्थल की सफाई करें
सुबह सबसे पहले अपने घर, दुकान, फैक्ट्री, ऑफिस, वर्कशॉप या वाहन की अच्छी तरह सफाई करें।
2. मशीनों और औजारों को सजाएँ
सभी मशीनों, औजारों और उपकरणों को साफ करके उन पर चंदन, अक्षत और फूल चढ़ाएँ।
3. भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित करें
स्वच्छ स्थान पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और कलश की स्थापना करें।
4. विधि-विधान से पूजा करें
रोली, अक्षत, चंदन, पुष्प, धूप, दीप, नारियल और फल अर्पित करें। इसके बाद विश्वकर्मा चालीसा या विश्वकर्मा आरती का पाठ करें।
5. मशीनों की पूजा करें
कार्य में उपयोग होने वाली मशीनों, वाहनों, कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर, औजार और अन्य उपकरणों पर तिलक लगाकर उनकी पूजा करें।
6. प्रसाद वितरण करें
पूजा के बाद सभी कर्मचारियों, सहकर्मियों और परिवार के सदस्यों में प्रसाद बाँटें।
विश्वकर्मा पूजा पर क्या करें?
भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें।
कार्यस्थल को साफ रखें।
मशीनों की नियमित देखभाल करें।
सुरक्षा नियमों का पालन करें।
कर्मचारियों और श्रमिकों का सम्मान करें।
ईमानदारी और गुणवत्ता के साथ कार्य करने का संकल्प लें।
विश्वकर्मा पूजा पर क्या नहीं करें?
मशीनों का गलत उपयोग न करें।
कार्यस्थल पर लापरवाही न करें।
सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी न करें।
अनावश्यक विवाद और क्रोध से बचें।
पूजा के दिन कार्यस्थल को गंदा न रखें।
फैक्ट्री, ऑफिस और वर्कशॉप में विश्वकर्मा पूजा कैसे मनाई जाती है?
भारत के अनेक उद्योगों, फैक्ट्रियों और वर्कशॉप में विश्वकर्मा पूजा विशेष उत्साह से मनाई जाती है। इस दिन मशीनों को साफ किया जाता है, उनकी पूजा की जाती है और कर्मचारियों के साथ सामूहिक आरती की जाती है।
कई कंपनियाँ इस अवसर पर Safety Training, Machine Maintenance और कर्मचारियों के सम्मान समारोह भी आयोजित करती हैं। इससे यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर सुरक्षा, गुणवत्ता और टीम भावना को मजबूत करने का अवसर भी बन जाता है।
बिहार और मिथिला में विश्वकर्मा पूजा
बिहार और मिथिला क्षेत्र में विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व है। दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय और पूर्णिया जैसे शहरों में फैक्ट्रियों, गैराज, ट्रांसपोर्ट कंपनियों, प्रिंटिंग प्रेस, मोबाइल रिपेयरिंग सेंटर, कंप्यूटर संस्थानों और तकनीकी कॉलेजों में भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है।
कई स्थानों पर भंडारे, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रसाद वितरण का आयोजन भी होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अपने कृषि उपकरणों और ट्रैक्टर की पूजा करते हैं, जबकि शहरों में उद्योग और व्यवसाय से जुड़े लोग मशीनों तथा आधुनिक उपकरणों का पूजन करते हैं।
Vishwakarma Puja 2026 Summary Table
विषय जानकारी
पर्व का नाम विश्वकर्मा पूजा 2026
मुख्य देवता भगवान विश्वकर्मा
तिथि कन्या संक्रांति (प्रकाशन से पहले प्रमाणिक पंचांग से सत्यापित करें)
पूजा का समय प्रातःकाल से दोपहर तक (स्थानीय पंचांग देखें)
पूजा का उद्देश्य कार्य, कौशल, मशीनों और औजारों का सम्मान
प्रमुख स्थान फैक्ट्री, वर्कशॉप, ऑफिस, उद्योग, दुकान, गैराज, तकनीकी संस्थान
विशेष परंपरा मशीन, वाहन और उपकरणों की पूजा
Vishwakarma Puja 2026 Timeline
सुबह
⬇️ स्नान एवं पूजा का संकल्प
⬇️
कार्यस्थल और मशीनों की सफाई
⬇️
भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित करें
⬇️
दोपहर
⬇️
पूजा-अर्चना
⬇️
मशीनों एवं औजारों का तिलक
⬇️
विश्वकर्मा आरती
⬇️
शाम
⬇️
प्रसाद वितरण
⬇️
कर्मचारियों का सम्मान
⬇️
कार्यस्थल की सुरक्षा एवं उन्नति की प्रार्थना
इंजीनियर, तकनीशियन और विद्यार्थियों के लिए विश्वकर्मा पूजा का महत्व
आज का भारत तेजी से तकनीकी विकास की ओर बढ़ रहा है। इंजीनियर, आर्किटेक्ट, मैकेनिक, इलेक्ट्रिशियन, कंप्यूटर इंजीनियर, डिज़ाइनर, तकनीकी छात्र और उद्योगों में कार्यरत लाखों लोग भगवान विश्वकर्मा को प्रेरणा का स्रोत मानते हैं।
विश्वकर्मा पूजा हमें यह संदेश देती है कि सफलता केवल आधुनिक मशीनों से नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुशासन, ईमानदारी और कौशल से मिलती है। यही कारण है कि कई इंजीनियरिंग कॉलेज, आईटीआई, पॉलिटेक्निक संस्थान और तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र भी इस दिन विशेष पूजा का आयोजन करते हैं।
व्यवसायियों और उद्योगों के लिए विश्वकर्मा पूजा का महत्व
विश्वकर्मा पूजा व्यापार और उद्योग जगत के लिए भी विशेष महत्व रखती है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े उद्योगों तक, सभी अपने कार्यस्थल और उपकरणों की पूजा करते हैं।
इस अवसर पर कई संस्थान—
मशीनों की सर्विसिंग करवाते हैं।
सुरक्षा उपकरणों की जांच करते हैं।
कर्मचारियों को सम्मानित करते हैं।
नए कार्य और परियोजनाओं की शुरुआत करते हैं।
कार्यस्थल की स्वच्छता और सुरक्षा का संकल्प लेते हैं।
इस प्रकार यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ बेहतर कार्य संस्कृति का भी संदेश देता है।
विश्वकर्मा पूजा से जुड़ी रोचक बातें
भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का प्रथम अभियंता कहा जाता है।
स्वर्गलोक, सोने की लंका और द्वारका के निर्माण का श्रेय भगवान विश्वकर्मा को दिया जाता है।
भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र और इंद्र का वज्र भी उनके दिव्य निर्माणों में बताए जाते हैं।
भारत के अनेक उद्योग इस दिन मशीनों को बंद रखकर उनकी पूजा करते हैं।
कई स्थानों पर नए वाहन और नई मशीनों का शुभारंभ भी इसी दिन किया जाता है।
विश्वकर्मा पूजा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि श्रम और कौशल के सम्मान का उत्सव भी है।
कार्यस्थल पर सुरक्षा का संदेश
विश्वकर्मा पूजा हमें केवल पूजा करना नहीं सिखाती, बल्कि सुरक्षित कार्य करने की प्रेरणा भी देती है।
इस दिन यह संकल्प लें—
हमेशा सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करेंगे।
मशीनों का नियमित रखरखाव करेंगे।
कार्यस्थल को स्वच्छ रखेंगे।
दुर्घटनाओं से बचने के लिए सभी सुरक्षा नियमों का पालन करेंगे।
अपने सहकर्मियों का सम्मान करेंगे।
यही भगवान विश्वकर्मा के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
Vishwakarma Puja 2026 FAQs
1. विश्वकर्मा पूजा 2026 कब है?
विश्वकर्मा पूजा कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है। प्रकाशित करने से पहले 2026 की अंतिम तिथि प्रमाणिक पंचांग से अवश्य सत्यापित करें।
2. भगवान विश्वकर्मा कौन हैं?
भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का दिव्य शिल्पकार, वास्तुकार और प्रथम अभियंता माना जाता है।
3. विश्वकर्मा पूजा किन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है?
इंजीनियर, मैकेनिक, कारीगर, तकनीशियन, उद्योगपति, दुकानदार, चालक, छात्र और सभी श्रमिकों के लिए यह पर्व विशेष महत्व रखता है।
4. इस दिन मशीनों की पूजा क्यों की जाती है?
मशीनें और औजार हमारे कार्य का आधार हैं। उनकी पूजा सम्मान, सुरक्षा और कार्य में सफलता की भावना का प्रतीक है।
5. क्या वाहन की पूजा भी की जाती है?
हाँ, कई लोग इस दिन कार, बाइक, ट्रैक्टर, बस, ट्रक और अन्य वाहनों की भी पूजा करते हैं।
6. क्या विश्वकर्मा पूजा केवल फैक्ट्री में होती है?
नहीं। घर, दुकान, ऑफिस, वर्कशॉप, प्रिंटिंग प्रेस, कंप्यूटर सेंटर, आईटी कंपनी और तकनीकी संस्थानों में भी यह पूजा की जाती है।
7. पूजा में कौन-कौन सी सामग्री लगती है?
भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा, रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नारियल, फल, मिठाई और कार्य में उपयोग होने वाले औजार।
8. क्या छात्र भी विश्वकर्मा पूजा कर सकते हैं?
हाँ, विशेष रूप से इंजीनियरिंग, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए यह दिन प्रेरणादायक माना जाता है।
9. विश्वकर्मा पूजा का सबसे बड़ा संदेश क्या है?
ईमानदारी, कौशल, श्रम का सम्मान और सुरक्षित कार्य संस्कृति।
10. बिहार और मिथिला में विश्वकर्मा पूजा कैसे मनाई जाती है?
फैक्ट्रियों, दुकानों, गैराज, कृषि उपकरणों, तकनीकी संस्थानों और वाहनों की पूजा के साथ यह पर्व बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
विश्वकर्मा पूजा 2026 पर शुभकामना संदेश
1. भगवान विश्वकर्मा आपके जीवन में नई ऊर्जा, सफलता और समृद्धि का संचार करें। विश्वकर्मा पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ।
2. आपके कार्य, व्यवसाय और उद्योग में निरंतर प्रगति हो तथा हर नई शुरुआत सफलता लेकर आए। शुभ विश्वकर्मा पूजा 2026।
3. भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद आपके परिवार, कार्यस्थल और व्यवसाय पर सदैव बना रहे। आपको विश्वकर्मा पूजा की मंगलमय शुभकामनाएँ।
क्या आप जानते हैं?
भारत में विश्वकर्मा पूजा के दिन हजारों फैक्ट्रियाँ, वर्कशॉप, गैराज और तकनीकी संस्थान मशीनों की विशेष पूजा करते हैं। यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि कौशल, श्रम, तकनीक और सुरक्षित कार्य संस्कृति के सम्मान का प्रतीक मानी जाती है।
निष्कर्ष
विश्वकर्मा पूजा 2026 केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारत की कार्य संस्कृति, तकनीकी प्रगति और श्रम के सम्मान का उत्सव है। भगवान विश्वकर्मा हमें यह प्रेरणा देते हैं कि जीवन में सफलता पाने के लिए केवल साधन ही नहीं, बल्कि सही सोच, मेहनत, अनुशासन और उत्कृष्ट कौशल भी आवश्यक है।
यदि हम अपने कार्य को पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ करें तथा अपने औजारों और संसाधनों का सम्मान करें, तो यही भगवान विश्वकर्मा की सच्ची आराधना होगी।
आइए, इस विश्वकर्मा पूजा पर हम सभी सुरक्षित कार्यस्थल, बेहतर तकनीक, उत्कृष्ट गुणवत्ता और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने का संकल्प लें।
भगवान विश्वकर्मा की कृपा से आपके जीवन, परिवार, व्यवसाय और कार्यक्षेत्र में सुख, समृद्धि और निरंतर सफलता का आगमन हो।
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