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Krishna Janmashtami Vrat Rules 2026: Complete Fasting Guide & Puja Vidhi

Krishna Janmashtami Vrat Rules 2026

भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और भक्ति का सबसे बड़ा उत्सव है। हर वर्ष जन्माष्टमी के दिन देश-विदेश में भगवान श्रीकृष्ण के भक्त पूरे दिन व्रत रखते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और मध्यरात्रि में भगवान के दिव्य जन्म का उत्सव मनाते हैं।

यदि आप Krishna Janmashtami Vrat Rules 2026 की पूरी जानकारी खोज रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए तैयार किया गया है। यहां आपको जन्माष्टमी व्रत रखने के सही नियम, पूजा की तैयारी, क्या करना चाहिए, किन बातों से बचना चाहिए और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करने के सरल उपाय विस्तार से बताए गए हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी का व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं है, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धि का भी प्रतीक माना जाता है। इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए संयम, सेवा और भक्ति का पालन करते हैं। माना जाता है कि सच्चे मन से रखा गया जन्माष्टमी व्रत परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आता है।


जन्माष्टमी व्रत का महत्व

हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना गया है। उनका जन्म धर्म की रक्षा, अधर्म के विनाश और मानवता को कर्मयोग का संदेश देने के लिए हुआ था।

इसी कारण जन्माष्टमी का व्रत अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते हैं, गीता का पाठ करते हैं और अपने जीवन में सत्य, प्रेम और करुणा अपनाने का संकल्प लेते हैं।

शास्त्रों के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक रखा गया जन्माष्टमी व्रत व्यक्ति के मानसिक और आध्यात्मिक जीवन को मजबूत बनाता है।


Krishna Janmashtami Vrat Rules 2026

यदि आप पहली बार जन्माष्टमी का व्रत रख रहे हैं, तो इन नियमों का पालन करना लाभदायक माना जाता है।

1. ब्रह्म मुहूर्त में उठें

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा शुरू करने से पहले भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें।

2. व्रत का संकल्प लें

पूजा स्थान पर दीप जलाकर भगवान श्रीकृष्ण के सामने पूरे दिन व्रत रखने का संकल्प लें।

3. मन और वाणी की पवित्रता रखें

इस दिन झूठ बोलने, क्रोध करने, किसी की निंदा करने और नकारात्मक विचार रखने से बचें।

4. भगवान श्रीकृष्ण का नाम जपें

पूरे दिन भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करें।

  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
  • हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे…

5. सात्विक भोजन करें

यदि स्वास्थ्य कारणों से निर्जला व्रत संभव न हो, तो फलाहार या दूध का सेवन कर सकते हैं।

6. मध्यरात्रि पूजा अवश्य करें

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में माना जाता है। इसलिए रात 12 बजे विशेष पूजा और आरती करना शुभ माना जाता है।

7. भगवान को प्रिय भोग लगाएं

माखन, मिश्री, दूध, दही, पंजीरी और फल भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करें।

8. प्रसाद बांटें

पूजा के बाद परिवार और भक्तों में प्रसाद वितरित करें तथा भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करें।


जन्माष्टमी व्रत रखने से पहले क्या करें?

व्रत शुरू करने से पहले घर और पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। यदि संभव हो तो बाल गोपाल के लिए एक सुंदर झूला सजाएं। पूजा की सभी सामग्री पहले से एकत्र कर लें ताकि पूजा के समय किसी प्रकार की परेशानी न हो।

घर के मंदिर में फूलों की सजावट करें, दीपक जलाएं और पूरे वातावरण को भक्तिमय बनाएं। यदि बच्चे घर में हैं, तो उन्हें भी भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के बारे में बताएं। इससे त्योहार का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।


इस दिन किन बातों का विशेष ध्यान रखें?

  • भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते रहें।
  • जरूरतमंदों की सहायता करें।
  • गाय को हरा चारा खिलाएं।
  • तुलसी के पौधे में जल अर्पित करें।
  • परिवार के साथ मिलकर भजन-कीर्तन करें।
  • गीता का एक अध्याय पढ़ने का प्रयास करें।

जन्माष्टमी पूजा सामग्री (Puja Samagri List)

भगवान श्रीकृष्ण की पूजा पूरे विधि-विधान से करने के लिए पहले से पूजा सामग्री तैयार रखना अच्छा माना जाता है। इससे पूजा के समय किसी प्रकार की बाधा नहीं आती और मन पूरी तरह भक्ति में लगा रहता है।

आवश्यक पूजा सामग्री

  • बाल गोपाल की प्रतिमा या तस्वीर
  • लकड़ी या चांदी का झूला
  • मोर पंख
  • बांसुरी
  • पीले या सफेद वस्त्र
  • मुकुट और आभूषण
  • तुलसी दल
  • फूलों की माला
  • चंदन
  • रोली
  • अक्षत (चावल)
  • धूप और दीप
  • अगरबत्ती
  • घी का दीपक
  • पंचामृत
  • गंगाजल
  • दूध
  • दही
  • घी
  • शहद
  • मिश्री
  • माखन
  • माखाना
  • पंजीरी
  • फल
  • नारियल
  • मिठाई
  • कलश
  • आम के पत्ते
  • घंटी
  • आरती की थाली

इन सभी वस्तुओं को पहले से एक स्थान पर व्यवस्थित करके रखें।


घर पर कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा कैसे करें?

यदि आप घर पर ही भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए चरणों का पालन कर सकते हैं।

1. पूजा स्थान की सफाई करें

सबसे पहले घर के मंदिर या पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें। यदि संभव हो तो फूलों, रंगोली और दीपकों से सजावट करें।


2. भगवान बाल गोपाल का झूला सजाएं

भगवान श्रीकृष्ण के लिए एक सुंदर झूला तैयार करें।

झूले को—

  • फूलों
  • मोतियों
  • रंगीन कपड़ों
  • बंदनवार

से सजाया जा सकता है।


3. कलश स्थापना करें

तांबे या पीतल के कलश में स्वच्छ जल भरें।

उसके ऊपर आम के पत्ते और नारियल स्थापित करें।


4. दीप प्रज्वलित करें

पूजा प्रारंभ करने से पहले घी का दीपक जलाएं।

इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें।


भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक कैसे करें?

मध्यरात्रि पूजा से पहले भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक करना शुभ माना जाता है।

अभिषेक के लिए इन वस्तुओं का उपयोग करें—

  • गंगाजल
  • दूध
  • दही
  • घी
  • शहद
  • शक्कर

इन्हें मिलाकर पंचामृत तैयार करें।

सबसे पहले गंगाजल से स्नान कराएं।

फिर पंचामृत से अभिषेक करें।

अंत में स्वच्छ जल से भगवान को स्नान कराएं।


भगवान को नए वस्त्र पहनाएं

अभिषेक के बाद भगवान बाल गोपाल को—

  • पीले वस्त्र
  • मोर मुकुट
  • बांसुरी
  • हार
  • कंगन

आदि से सुंदर श्रृंगार करें।

यदि आपके पास छोटा झूला है, तो भगवान को उसमें विराजमान करें।


भगवान श्रीकृष्ण को कौन-सा भोग लगाएं?

भगवान श्रीकृष्ण को माखन अत्यंत प्रिय माना जाता है।

जन्माष्टमी के दिन आप यह भोग लगा सकते हैं—

  • माखन-मिश्री
  • माखाना की खीर
  • पंजीरी
  • पेड़ा
  • दूध
  • दही
  • मक्खन
  • फल
  • नारियल
  • सूखे मेवे
  • पंचामृत
  • लौकी की खीर
  • साबूदाना खीर

तुलसी दल के बिना भोग अधूरा माना जाता है, इसलिए प्रत्येक भोग में तुलसी दल अवश्य रखें।


मध्यरात्रि पूजा का महत्व

शास्त्रों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि में हुआ था।

इसी कारण अधिकांश श्रद्धालु पूरे दिन व्रत रखते हैं और रात 12 बजे विशेष पूजा करते हैं।

मध्यरात्रि में—

  • शंख बजाया जाता है।
  • घंटियां बजाई जाती हैं।
  • भगवान को झूला झुलाया जाता है।
  • आरती की जाती है।
  • भजन-कीर्तन होता है।
  • प्रसाद वितरित किया जाता है।

यह समय जन्माष्टमी पूजा का सबसे महत्वपूर्ण क्षण माना जाता है।


पूजा के समय कौन-से मंत्र बोलें?

पूजा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं।

मंत्र 1

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।


मंत्र 2

हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे।।


मंत्र 3

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।
प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः।।


जन्माष्टमी की रात ये कार्य भी करें

  • भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें।
  • श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करें।
  • श्रीमद्भागवत की कथा सुनें।
  • परिवार के साथ भजन गाएं।
  • बच्चों को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं सुनाएं।
  • मंदिर जाएं या ऑनलाइन दर्शन करें।
  • प्रसाद वितरित करें।

जन्माष्टमी पूजा के दौरान होने वाली सामान्य गलतियां

कई श्रद्धालु अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं जिनसे बचना चाहिए।

  • बिना स्नान पूजा करना।
  • तुलसी दल के बिना भोग लगाना।
  • पूजा के समय जल्दबाजी करना।
  • पूजा स्थल को साफ न रखना।
  • क्रोध या विवाद करना।
  • केवल परंपरा निभाने के लिए पूजा करना, श्रद्धा का अभाव रखना।

व्रत में क्या खाएं? (Janmashtami Vrat Food)

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत श्रद्धा, संयम और सात्विकता का प्रतीक माना जाता है। यदि आप निर्जला व्रत नहीं रख सकते, तो फलाहार कर सकते हैं। व्रत के दौरान केवल सात्विक और व्रत में स्वीकार्य खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

व्रत में खाए जाने वाले खाद्य पदार्थ

  • दूध और दही
  • माखन और मिश्री
  • माखाना
  • साबूदाना खिचड़ी
  • साबूदाना खीर
  • सिंघाड़े के आटे की पूरी
  • कुट्टू के आटे की रोटी
  • राजगिरा आटा
  • सामक के चावल
  • सेंधा नमक
  • आलू की सब्जी
  • मूंगफली
  • बादाम, काजू, किशमिश
  • नारियल पानी
  • मौसमी फल
  • फलों का जूस (बिना चीनी)

इन खाद्य पदार्थों से शरीर को ऊर्जा भी मिलती है और व्रत का पालन भी सही ढंग से होता है।


जन्माष्टमी व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?

व्रत के दौरान कुछ चीजों से पूरी तरह बचना चाहिए।

इन चीजों का सेवन न करें

  • गेहूं का आटा
  • चावल (सामान्य)
  • दाल
  • प्याज
  • लहसुन
  • मांसाहार
  • अंडा
  • शराब या नशीले पदार्थ
  • तंबाकू
  • साधारण नमक
  • बाहर का तला हुआ भोजन
  • फास्ट फूड

धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत के दिन सात्विक भोजन और संयम का पालन करना अधिक शुभ माना जाता है।


जन्माष्टमी व्रत का पारण कैसे करें?

जन्माष्टमी व्रत का पारण (व्रत खोलना) भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है जितना व्रत रखना।

मध्यरात्रि पूजा और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के बाद भक्त प्रसाद ग्रहण करते हैं। कई लोग अगले दिन निर्धारित पारण समय पर व्रत समाप्त करते हैं। स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण का समय देखना उचित रहता है।

पारण करते समय ध्यान रखें

  • सबसे पहले भगवान को भोग लगाएं।
  • तुलसी युक्त प्रसाद ग्रहण करें।
  • जल पीकर व्रत खोलें।
  • उसके बाद हल्का सात्विक भोजन करें।
  • एकदम भारी भोजन करने से बचें।

गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे क्या करें?

हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है।

यदि कोई गर्भवती महिला, बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति पूरे दिन उपवास नहीं रख सकता, तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।

वे—

  • फलाहार कर सकते हैं।
  • दूध और सूखे मेवे ले सकते हैं।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार भोजन कर सकते हैं।

धार्मिक परंपराओं में भी स्वास्थ्य की उपेक्षा करने की सलाह नहीं दी गई है। यदि किसी को बीमारी है या नियमित दवा लेनी पड़ती है, तो डॉक्टर की सलाह लेना उचित है।


जन्माष्टमी व्रत रखने के आध्यात्मिक लाभ

शास्त्रों के अनुसार श्रद्धा और भक्ति से किया गया व्रत मन को शांति प्रदान करता है।

भक्तों की मान्यता है कि जन्माष्टमी का व्रत रखने से—

  • भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • मन में सकारात्मकता बढ़ती है।
  • आत्मसंयम विकसित होता है।
  • भक्ति और आध्यात्मिकता मजबूत होती है।
  • परिवार में सुख और शांति की भावना बढ़ती है।

ये धार्मिक मान्यताएं हैं और इन्हें श्रद्धा के भाव से देखा जाता है।


जन्माष्टमी से मिलने वाली जीवन की सीख

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन केवल पूजा का विषय नहीं, बल्कि जीवन जीने की प्रेरणा भी है।

वे हमें सिखाते हैं—

  • कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य रखें।
  • सत्य और धर्म का साथ दें।
  • कर्म करते रहें, फल की चिंता न करें।
  • प्रेम और करुणा का व्यवहार अपनाएं।
  • परिवार और समाज दोनों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

इसी कारण जन्माष्टमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों का भी उत्सव है।


जन्माष्टमी के दिन किए जाने वाले शुभ कार्य

यदि आप इस दिन विशेष पुण्य प्राप्त करना चाहते हैं, तो ये कार्य कर सकते हैं—

  • भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर में दर्शन करें।
  • श्रीमद्भगवद्गीता का अध्ययन करें।
  • गाय को हरा चारा खिलाएं।
  • गरीबों को भोजन कराएं।
  • बच्चों को फल या मिठाई बांटें।
  • तुलसी का पौधा लगाएं या उसकी सेवा करें।
  • परिवार के साथ भजन-कीर्तन करें।
  • जरूरतमंद लोगों की सहायता करें।

इन गलतियों से बचें

जन्माष्टमी के दिन इन बातों का ध्यान रखें—

  • केवल दिखावे के लिए व्रत न रखें।
  • पूजा में जल्दबाजी न करें।
  • प्रसाद का अनादर न करें।
  • क्रोध और विवाद से बचें।
  • मंदिर या पूजा स्थल की सफाई का ध्यान रखें।
  • भगवान को बिना तुलसी दल के भोग न लगाएं (जहां परंपरा में यह प्रचलित हो)।

क्या बच्चों को भी व्रत रखना चाहिए?

छोटे बच्चों के लिए पूरा दिन उपवास रखना आवश्यक नहीं माना जाता। उन्हें भगवान श्रीकृष्ण की कहानियां सुनाना, भजन गाना, झांकी सजाना और पूजा में शामिल करना अधिक उपयोगी होता है।

इससे वे भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को सहज रूप से समझ पाते हैं।

1. Krishna Janmashtami Vrat Rules 2026 क्या हैं?

जन्माष्टमी व्रत में सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूरे दिन सात्विक जीवन अपनाया जाता है, भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया जाता है और मध्यरात्रि में उनके जन्म के समय विशेष पूजा एवं आरती की जाती है।


2. जन्माष्टमी व्रत में क्या खाया जा सकता है?

व्रत के दौरान फल, दूध, दही, माखन, मिश्री, माखाना, साबूदाना, सामक के चावल, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, सेंधा नमक और सूखे मेवों का सेवन किया जा सकता है।


3. जन्माष्टमी व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?

व्रत के दौरान गेहूं, चावल, दाल, प्याज, लहसुन, मांसाहार, शराब, तंबाकू और सामान्य नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।


4. क्या जन्माष्टमी का व्रत निर्जला रखना जरूरी है?

नहीं। यदि स्वास्थ्य अनुमति देता है तो निर्जला व्रत रखा जा सकता है। अन्यथा फलाहार या दूध का सेवन करके भी श्रद्धापूर्वक व्रत रखा जा सकता है।


5. जन्माष्टमी की पूजा किस समय करनी चाहिए?

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में माना जाता है। इसलिए मुख्य पूजा, अभिषेक और आरती रात 12 बजे के आसपास की जाती है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित है।


6. भगवान श्रीकृष्ण को कौन-सा भोग सबसे प्रिय है?

माखन-मिश्री, दूध, दही, पंजीरी, माखाना, फल, पेड़ा और तुलसी दल सहित सात्विक भोग भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किए जाते हैं।


7. क्या घर पर जन्माष्टमी पूजा कर सकते हैं?

हाँ। घर में बाल गोपाल की प्रतिमा स्थापित करके, झूला सजाकर, अभिषेक, आरती और भोग के साथ श्रद्धापूर्वक जन्माष्टमी मनाई जा सकती है।


8. जन्माष्टमी व्रत रखने से क्या लाभ होता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से मन को शांति मिलती है, भक्ति बढ़ती है और भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है।


9. क्या बच्चे और बुजुर्ग व्रत रख सकते हैं?

यदि स्वास्थ्य अनुमति दे तो रख सकते हैं। अन्यथा फलाहार या हल्का सात्विक भोजन लेकर भी भगवान की पूजा की जा सकती है। आवश्यकता होने पर डॉक्टर की सलाह लें।


10. जन्माष्टमी का सबसे महत्वपूर्ण संदेश क्या है?

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें सत्य, धर्म, प्रेम, सेवा, कर्मयोग और करुणा का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है।


निष्कर्ष (Conclusion)

Krishna Janmashtami Vrat Rules 2026 केवल व्रत रखने के नियमों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का अवसर भी है। जन्माष्टमी हमें सिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, सत्य, प्रेम और कर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।

यदि आप श्रद्धा, भक्ति और नियमों के साथ जन्माष्टमी का व्रत रखते हैं, तो यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आत्मिक शांति और सकारात्मक जीवन की ओर बढ़ने का माध्यम बन सकता है। पूजा के साथ-साथ सेवा, दान, गौसेवा और जरूरतमंदों की सहायता करने का प्रयास करें। यही भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं का वास्तविक पालन है।

राधे-राधे! जय श्रीकृष्ण! 🙏

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Jai Mithila

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