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Hartalika Teej 2026: कब है? सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा, महत्व और मिथिला की विशेष परंपरा

हरतालिका तीज 2026 को लेकर देशभर की महिलाओं में अभी से उत्साह देखा जा रहा है। विशेष रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और नेपाल के मिथिला क्षेत्र में इस पर्व की तैयारियाँ कई दिन पहले शुरू हो जाती हैं। बाजारों में पूजा सामग्री, श्रृंगार का सामान, साड़ी, चूड़ियाँ और भगवान शिव-पार्वती की प्रतिमाओं की खरीदारी तेज हो जाती है।
यदि आप Hartalika Teej 2026 का व्रत रखने जा रही हैं या अपने परिवार के लिए इसकी संपूर्ण जानकारी ढूँढ रहे हैं, तो इस लेख में आपको सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा, व्रत नियम और धार्मिक महत्व की विस्तृत जानकारी मिलेगी।
महत्वपूर्ण सूचना: लेख प्रकाशित करने से पहले 2026 की अंतिम तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत पारण का समय किसी प्रमाणिक पंचांग से अवश्य सत्यापित करें।
Table of Contents
हरतालिका तीज क्या है?
Hartalika Teej 2026 कब है?
शुभ मुहूर्त
व्रत का महत्व
पूजा सामग्री
संपूर्ण पूजा विधि
व्रत नियम
शिव-पार्वती की कथा
मिथिला की परंपरा
FAQ
हरतालिका तीज क्या है?
हरतालिका तीज हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र व्रत है, जिसे मुख्य रूप से विवाहित महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से रखती हैं। अविवाहित कन्याएँ भी मनचाहे योग्य वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत श्रद्धापूर्वक करती हैं।
इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप और निर्जला व्रत किया था। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। उसी घटना की स्मृति में हर वर्ष हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है।
Hartalika Teej 2026 कब है?
हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस दिन महिलाएँ प्रातःकाल स्नान करके निर्जला व्रत का संकल्प लेती हैं और रात्रि में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं।
कई स्थानों पर महिलाएँ पूरी रात जागरण, भजन-कीर्तन और कथा श्रवण भी करती हैं।
नोट: लेख प्रकाशित करने से पहले 2026 की सही तिथि और शुभ मुहूर्त अवश्य अपडेट करें।
हरतालिका तीज का धार्मिक महत्व
हरतालिका तीज केवल एक व्रत नहीं, बल्कि अटूट प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक है। यह पर्व हमें माता पार्वती की तपस्या, धैर्य और दृढ़ संकल्प की याद दिलाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से—
अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
वैवाहिक जीवन में सुख और प्रेम बना रहता है।
भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद मिलता है।
परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
हरतालिका तीज 2026 पूजा सामग्री
भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा
मिट्टी या बालू से बना शिवलिंग (यदि परंपरा हो)
बेलपत्र
धतूरा
आक के फूल
चंदन
रोली
अक्षत
फूलों की माला
धूप
दीप
घी
नारियल
फल
पंचामृत
मिठाई
सुपारी
पान के पत्ते
कलश
लाल या हरे वस्त्र
श्रृंगार का सामान
मेहंदी
चूड़ियाँ
हरतालिका तीज 2026 पूजा विधि
1. प्रातःकाल स्नान करें
सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. व्रत का संकल्प लें
भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए निर्जला व्रत का संकल्प लें।
3. पूजा स्थल तैयार करें
पूजा स्थान को साफ करके भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
4. विधिपूर्वक पूजा करें
बेलपत्र, धतूरा, पुष्प, चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
5. हरतालिका व्रत कथा सुनें
पूजा के दौरान हरतालिका तीज की कथा का श्रवण करना शुभ माना जाता है।
6. आरती करें
पूजा के अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करें
हरतालिका तीज व्रत कथा (Hartalika Teej Vrat Katha)
हरतालिका तीज की कथा माता पार्वती की अटूट तपस्या, भगवान शिव के प्रति उनकी अनन्य भक्ति और दृढ़ संकल्प की कहानी है। यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा, धैर्य और विश्वास से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पर्वतराज हिमालय की पुत्री माता पार्वती बचपन से ही भगवान शिव को अपना पति मानती थीं। उन्होंने मन ही मन यह संकल्प लिया कि वे विवाह करेंगी तो केवल भगवान शिव से ही करेंगी।
उधर भगवान विष्णु भी माता पार्वती के गुणों से प्रभावित थे। एक समय देवर्षि नारद ने हिमालयराज को भगवान विष्णु से पार्वती का विवाह करने का सुझाव दिया। हिमालयराज इस प्रस्ताव के लिए तैयार हो गए।
जब माता पार्वती को यह बात पता चली तो वे अत्यंत दुखी हो गईं। उन्होंने अपनी एक प्रिय सखी को अपनी इच्छा बताई कि वे केवल भगवान शिव को ही पति के रूप में स्वीकार करेंगी।
सखी माता पार्वती को लेकर घने जंगल में चली गईं ताकि उनका विवाह भगवान विष्णु से न हो सके। इसी घटना के कारण इस व्रत का नाम “हरतालिका” पड़ा। “हर” का अर्थ है हर लेना (अपहरण करना) और “आलिका” का अर्थ है सखी। अर्थात सखी द्वारा माता पार्वती को अपने साथ ले जाना।
जंगल में माता पार्वती ने कठोर तपस्या आरंभ की। उन्होंने कई वर्षों तक केवल फल, पत्ते और अंत में निर्जल रहकर भगवान शिव की आराधना की। उनकी अटूट भक्ति और कठिन तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया।
बाद में माता पार्वती का विवाह भगवान शिव के साथ संपन्न हुआ। तभी से यह व्रत सुहाग, प्रेम और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
हरतालिका तीज का धार्मिक महत्व
हरतालिका तीज केवल एक पर्व नहीं, बल्कि नारी शक्ति, विश्वास और समर्पण का उत्सव है। यह व्रत हमें माता पार्वती के धैर्य और दृढ़ निश्चय से प्रेरणा देता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से—
भगवान शिव और माता पार्वती का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
वैवाहिक जीवन में प्रेम और विश्वास बढ़ता है।
परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
मनोकामनाएँ पूर्ण होने की मान्यता है।
अविवाहित कन्याओं को योग्य जीवनसाथी मिलने की प्रार्थना की जाती है।
हरतालिका तीज व्रत के नियम
हरतालिका तीज का व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है। कई महिलाएँ इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं और अगले दिन पूजा के बाद ही पारण करती हैं।
व्रत के दौरान क्या करें?
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
पूरे दिन संयम और शांत मन रखें।
पूजा के समय बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित करें।
हरतालिका व्रत कथा का श्रवण करें।
शिव चालीसा, शिव मंत्र या “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें।
रात्रि जागरण और भजन-कीर्तन करें (यदि परिवार की परंपरा हो)।
हरतालिका तीज पर क्या नहीं करें?
क्रोध, विवाद और कटु वचन से बचें।
किसी का अपमान न करें।
पूजा में जल्दबाजी न करें।
असत्य और छल का सहारा न लें।
व्रत के नियमों का जानबूझकर उल्लंघन न करें।
मिथिला में हरतालिका तीज की परंपरा
मिथिला क्षेत्र में हरतालिका तीज अत्यंत श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाई जाती है। इस दिन महिलाएँ सुबह से ही व्रत रखती हैं और शाम को नए वस्त्र, चूड़ियाँ, सिंदूर और मेहंदी से श्रृंगार करती हैं।
घरों और मंदिरों में भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। महिलाएँ समूह में बैठकर तीज के पारंपरिक मैथिली गीत गाती हैं और व्रत कथा सुनती हैं। कई स्थानों पर पूरी रात भजन-कीर्तन और जागरण का आयोजन भी होता है।
मिथिला में यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि परिवार और समाज को जोड़ने वाला सांस्कृतिक उत्सव भी माना जाता है।
दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी और जनकपुर में हरतालिका तीज
दरभंगा
दरभंगा के प्राचीन शिव मंदिरों में हरतालिका तीज के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना होती है। बड़ी संख्या में महिलाएँ निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव का जलाभिषेक करती हैं।
मधुबनी
मधुबनी में महिलाएँ पारंपरिक मैथिली परिधान पहनकर सामूहिक पूजा करती हैं। कई स्थानों पर लोकगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
सीतामढ़ी
सीतामढ़ी में हरतालिका तीज के दिन शिव मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं। महिलाएँ शिव-पार्वती की पूजा कर अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
समस्तीपुर
समस्तीपुर के गांवों और कस्बों में महिलाएँ परिवार के साथ व्रत रखती हैं। शाम के समय सामूहिक पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है।
जनकपुर (नेपाल)
जनकपुर धाम में हरतालिका तीज का विशेष महत्व है। हजारों श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन और पूजा के लिए पहुँचते हैं। पारंपरिक नृत्य, भजन और धार्मिक कार्यक्रम इस पर्व की शोभा बढ़ाते हैं।
हरतालिका तीज से मिलने वाली जीवन की सीख
माता पार्वती की तपस्या हमें सिखाती है कि जीवन में धैर्य, विश्वास और दृढ़ संकल्प सबसे बड़ी शक्ति हैं। भगवान शिव का जीवन सादगी, संतुलन और करुणा का संदेश देता है।
यह पर्व हमें प्रेरित करता है कि—
रिश्तों में विश्वास बनाए रखें।
परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का सम्मान करें।
कठिन समय में धैर्य न खोएँ।
ईश्वर के प्रति आस्था बनाए रखें।
प्रेम, त्याग और समर्पण को जीवन का आधार बनाएं।
हरतालिका तीज 2026: Summary Table
विषय जानकारी
पर्व का नाम हरतालिका तीज 2026
तिथि भाद्रपद शुक्ल पक्ष तृतीया (प्रकाशन से पहले पंचांग से सत्यापित करें)
मुख्य देवी-देवता भगवान शिव एवं माता पार्वती
व्रत का प्रकार निर्जला व्रत (परंपरा अनुसार)
पूजा का समय प्रातः एवं प्रदोष काल (स्थानीय पंचांग देखें)
मुख्य उद्देश्य अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन एवं मनचाहे वर की प्राप्ति
प्रमुख राज्य बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, नेपाल
हरतालिका तीज 2026 Timeline
प्रातःकाल
⬇️ ब्रह्म मुहूर्त में जागें
⬇️ स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
⬇️ निर्जला व्रत का संकल्प लें
⬇️
दोपहर
⬇️ पूजा सामग्री तैयार करें
⬇️ भगवान शिव एवं माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें
⬇️
सायंकाल
⬇️ विधि-विधान से पूजा करें
⬇️ हरतालिका व्रत कथा सुनें
⬇️ शिव-पार्वती की आरती करें
⬇️
रात्रि
⬇️ भजन-कीर्तन एवं जागरण
⬇️ अगले दिन विधिपूर्वक व्रत पारण
हरतालिका तीज पर होने वाली सामान्य गलतियाँ
हरतालिका तीज का व्रत श्रद्धा और नियमों का पर्व है। इसलिए पूजा करते समय कुछ सामान्य बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
बिना संकल्प के व्रत शुरू न करें।
पूजा सामग्री पहले से तैयार रखें।
बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित करते समय साफ और ताज़ा रखें।
पूजा के समय मोबाइल या अन्य कार्यों में व्यस्त न रहें।
क्रोध, विवाद और कटु वचन से बचें।
पूजा के बाद प्रसाद सभी परिवारजनों में बाँटें।
यदि स्वास्थ्य कारणों से निर्जला व्रत संभव न हो, तो स्थानीय परंपरा और चिकित्सकीय सलाह का सम्मान करें।
हरतालिका तीज 2026 से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. हरतालिका तीज 2026 कब है?
हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। प्रकाशित करने से पहले 2026 की अंतिम तिथि प्रमाणिक पंचांग से अवश्य सत्यापित करें।
2. हरतालिका तीज का व्रत कौन रख सकता है?
विवाहित महिलाएँ अखंड सौभाग्य के लिए तथा अविवाहित कन्याएँ योग्य वर की कामना से यह व्रत रख सकती हैं।
3. क्या हरतालिका तीज का व्रत निर्जला होता है?
कई परंपराओं में इसे निर्जला व्रत माना जाता है, लेकिन क्षेत्रीय परंपराओं में अंतर हो सकता है।
4. हरतालिका तीज पर किसकी पूजा की जाती है?
इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है।
5. हरतालिका तीज का सबसे बड़ा महत्व क्या है?
यह व्रत दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
6. पूजा में कौन-कौन सी सामग्री आवश्यक होती है?
बेलपत्र, धतूरा, पुष्प, चंदन, धूप, दीप, फल, मिठाई, श्रृंगार सामग्री और शिव-पार्वती की प्रतिमा।
7. क्या अविवाहित लड़कियाँ भी यह व्रत रख सकती हैं?
हाँ, धार्मिक मान्यता के अनुसार योग्य जीवनसाथी की कामना से अविवाहित कन्याएँ भी यह व्रत रखती हैं।
8. हरतालिका तीज की कथा सुनना क्यों आवश्यक माना जाता है?
मान्यता है कि व्रत कथा सुनने से व्रत पूर्ण माना जाता है और पूजा का धार्मिक महत्व बढ़ता है।
9. क्या इस दिन मेहंदी लगाना शुभ माना जाता है?
हाँ, हरतालिका तीज पर मेहंदी, चूड़ियाँ और सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व माना जाता है।
10. क्या हरतालिका तीज पूरे भारत में मनाई जाती है?
हाँ, विशेष रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और नेपाल के कई क्षेत्रों में यह पर्व बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
हरतालिका तीज पर शुभकामना संदेश
1. भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद आपके दांपत्य जीवन में सुख, प्रेम और समृद्धि बनाए रखे। हरतालिका तीज की हार्दिक शुभकामनाएँ।
2. माता पार्वती की अटूट भक्ति और भगवान शिव की कृपा आपके जीवन में खुशियों का संचार करे। शुभ हरतालिका तीज 2026।
3. शिव-पार्वती की कृपा से आपके परिवार में सदैव सुख, शांति और सौभाग्य बना रहे। हरतालिका तीज की मंगलमय शुभकामनाएँ।
क्या आप जानते हैं?
हरतालिका शब्द “हर” (हर लेना) और “आलिका” (सखी) से मिलकर बना है।
यह व्रत माता पार्वती की कठोर तपस्या की स्मृति में मनाया जाता है।
नेपाल के जनकपुर सहित मिथिला क्षेत्र में इस पर्व का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।
कई स्थानों पर महिलाएँ पूरी रात भजन-कीर्तन और जागरण करती हैं।
इस दिन शिव-पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजा करने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में प्रचलित है।
हरतालिका तीज 2026 का आधुनिक स्वरूप
समय के साथ हरतालिका तीज मनाने के तरीकों में बदलाव आया है, लेकिन इसकी धार्मिक आस्था और महत्व आज भी पहले की तरह अटूट है। पहले महिलाएँ केवल घर और मंदिर में पूजा-अर्चना करती थीं, जबकि आज कई स्थानों पर सामूहिक पूजा, भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं। सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के कारण नई पीढ़ी भी इस पावन पर्व की परंपराओं और महत्व को आसानी से जान रही है।
आज हरतालिका तीज केवल एक धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि परिवार, संस्कृति और परंपरा को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण उत्सव बन चुका है। यह पर्व हमें विश्वास, धैर्य, प्रेम और समर्पण का संदेश देता है।
मिथिला में हरतालिका तीज का सांस्कृतिक महत्व
मिथिला की संस्कृति में हरतालिका तीज का विशेष स्थान है। इस दिन विवाहित और अविवाहित महिलाएँ पारंपरिक मैथिली वेशभूषा धारण कर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। घरों और मंदिरों को फूलों से सजाया जाता है तथा पारंपरिक मैथिली तीज गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, सहरसा, सुपौल और नेपाल के जनकपुर धाम में यह पर्व अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। कई स्थानों पर महिलाएँ सामूहिक रूप से व्रत कथा सुनती हैं, भजन-कीर्तन करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। यही परंपराएँ हरतालिका तीज को केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती हैं।
हरतालिका तीज से मिलने वाली प्रेरणा
माता पार्वती की तपस्या हमें सिखाती है कि सच्चा प्रेम, अटूट विश्वास और दृढ़ संकल्प जीवन की सबसे बड़ी शक्तियाँ हैं। भगवान शिव का सरल, शांत और करुणामय स्वरूप हमें विनम्रता, धैर्य और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
हरतालिका तीज का संदेश केवल व्रत रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमें अपने परिवार, रिश्तों और जीवन के प्रति जिम्मेदार बनने की सीख भी देता है। यही कारण है कि यह पर्व आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
निष्कर्ष (Conclusion)
Hartalika Teej 2026 केवल एक धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, समर्पण और अखंड सौभाग्य का प्रतीक है। माता पार्वती की कठिन तपस्या और भगवान शिव के प्रति उनकी अटूट भक्ति हमें यह सिखाती है कि धैर्य, श्रद्धा और सच्चे संकल्प से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
यदि आप इस वर्ष हरतालिका तीज का व्रत रखने जा रही हैं, तो श्रद्धा और विधि-विधान के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएँ और परिवार में प्रेम, विश्वास तथा सम्मान की भावना को और मजबूत बनाएं। यही इस पावन पर्व का वास्तविक संदेश है।
यदि आपको Hartalika Teej 2026 से जुड़ी यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो इसे अपने परिवार, मित्रों और सोशल मीडिया पर अवश्य साझा करें, ताकि अधिक से अधिक लोग इस पावन पर्व की सही तिथि, पूजा विधि, व्रत कथा और धार्मिक महत्व के बारे में विश्वसनीय जानकारी प्राप्त कर सकें।
आप सभी को हरतालिका तीज 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ।
॥ हर हर महादेव ॥ 🙏
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