आज के रिश्ते इतने कमजोर क्यों हो गए — यह सवाल आज हर घर, हर दिल और हर रिश्ते में महसूस किया जा सकता है।
जो रिश्ते कभी इंसान की ताकत हुआ करते थे, आज वही तनाव और परेशानी की वजह बनते जा रहे हैं।
पहले लोग कम में खुश रहते थे, आज सब कुछ होते हुए भी रिश्तों में खालीपन है।
संपर्क बढ़ा है, लेकिन अपनापन कम हुआ है।
पहले रिश्ते ज़रूरत नहीं, जिम्मेदारी हुआ करते थे।
आज रिश्ते सुविधा और option बन चुके हैं।
आज की सोच है:
जब तक फायदा है, रिश्ता है
जब तक मन अच्छा है, साथ है
यही सोच रिश्तों को कमजोर बना रही है।
मोबाइल आज रिश्तों का सबसे बड़ा दुश्मन बन चुका है।
एक ही घर में:
सब साथ हैं, लेकिन बात नहीं
सब online हैं, लेकिन emotionally offline
सोशल मीडिया पर दूसरों की perfect ज़िंदगी देखकर लोग अपने रिश्तों से असंतुष्ट हो जाते हैं।
यहीं से तुलना और दूरी शुरू होती है।
आज रिश्ते इसलिए टूटते हैं क्योंकि:
कोई झुकना नहीं चाहता
कोई गलती मानना नहीं चाहता
Ego ने “माफी” को कमजोरी बना दिया है।
जबकि सच्चाई यह है कि रिश्तों में झुकने वाला ही मजबूत होता है।
आज इंसान से पहले उसकी कमाई पूछी जाती है।
भावनाओं की जगह पैकेज और स्टेटस ने ले ली है।
जब रिश्ते पैसों पर टिकते हैं,
तो मुश्किल समय में टूट जाते हैं।
संयुक्त परिवार टूटे,
बुज़ुर्ग अकेले हुए,
बच्चे स्क्रीन के हवाले हो गए।
स्वतंत्रता के नाम पर इंसान अकेला होता जा रहा है।
रिश्ते होते हुए भी लोग अकेलापन महसूस कर रहे हैं।
आज की पीढ़ी बुरी नहीं है,
लेकिन बहुत ज़्यादा दबाव में है।
Career pressure
Competition
Expectations
इन सबके बीच रिश्तों को समय देना मुश्किल हो जाता है।
रिश्ते एक दिन में नहीं टूटते।
वे तब टूटते हैं जब बात बंद हो जाती है।
सुनना बंद
समझना बंद
महसूस करना बंद
यहीं से दूरी बढ़ती है।
आज सब कुछ instant चाहिए:
Instant happiness
Instant success
Instant relationship
लेकिन रिश्तों को समय, समझ और धैर्य चाहिए।
जहाँ धैर्य नहीं, वहाँ रिश्ता नहीं।
आज शादी जिम्मेदारी नहीं, डर बन गई है।
लोग पहले ही सोच लेते हैं —
“अगर धोखा मिला तो?”
डर रिश्तों की नींव को कमजोर कर देता है।
रिश्ते आज भी वही हैं।
बस निभाने वाले बदल गए हैं।
हम:
समय नहीं देते
माफ नहीं करते
समझौता नहीं करते
खुलकर बात करें
सुनना सीखें
Ego कम करें
तुलना बंद करें
मोबाइल से ज़्यादा इंसान देखें
रिश्तों को समय दें
आज के रिश्ते कमजोर इसलिए नहीं हुए क्योंकि दुनिया बदल गई,
बल्कि इसलिए क्योंकि हमारी प्राथमिकताएँ बदल गईं।
अगर हम चाहें तो:
रिश्ते फिर मजबूत हो सकते हैं
परिवार फिर खुश हो सकते हैं
रिश्ते छोड़ने से नहीं, निभाने से मजबूत होते हैं।
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