आज के रिश्ते इतने कमजोर क्यों हो गए? | मोबाइल, ego और बदलती सोच का कड़वा सच

आज के रिश्ते इतने कमजोर क्यों हो गए

भूमिका: जब रिश्ते बोझ लगने लगे

आज के रिश्ते इतने कमजोर क्यों हो गए — यह सवाल आज हर घर, हर दिल और हर रिश्ते में महसूस किया जा सकता है।
जो रिश्ते कभी इंसान की ताकत हुआ करते थे, आज वही तनाव और परेशानी की वजह बनते जा रहे हैं।

पहले लोग कम में खुश रहते थे, आज सब कुछ होते हुए भी रिश्तों में खालीपन है।
संपर्क बढ़ा है, लेकिन अपनापन कम हुआ है।


समय के साथ सोच कैसे बदल गई

पहले रिश्ते ज़रूरत नहीं, जिम्मेदारी हुआ करते थे।
आज रिश्ते सुविधा और option बन चुके हैं।

आज की सोच है:

  • जब तक फायदा है, रिश्ता है

  • जब तक मन अच्छा है, साथ है

यही सोच रिश्तों को कमजोर बना रही है।


मोबाइल और सोशल मीडिया का असर रिश्तों पर

मोबाइल आज रिश्तों का सबसे बड़ा दुश्मन बन चुका है।

एक ही घर में:

  • सब साथ हैं, लेकिन बात नहीं

  • सब online हैं, लेकिन emotionally offline

सोशल मीडिया पर दूसरों की perfect ज़िंदगी देखकर लोग अपने रिश्तों से असंतुष्ट हो जाते हैं।
यहीं से तुलना और दूरी शुरू होती है।


Ego: रिश्तों को चुपचाप मारने वाली बीमारी

आज रिश्ते इसलिए टूटते हैं क्योंकि:

  • कोई झुकना नहीं चाहता

  • कोई गलती मानना नहीं चाहता

Ego ने “माफी” को कमजोरी बना दिया है।
जबकि सच्चाई यह है कि रिश्तों में झुकने वाला ही मजबूत होता है।


पैसा और स्टेटस रिश्तों से ऊपर क्यों हो गया

आज इंसान से पहले उसकी कमाई पूछी जाती है।
भावनाओं की जगह पैकेज और स्टेटस ने ले ली है।

जब रिश्ते पैसों पर टिकते हैं,
तो मुश्किल समय में टूट जाते हैं।


परिवार से दूरी और अकेलापन

संयुक्त परिवार टूटे,
बुज़ुर्ग अकेले हुए,
बच्चे स्क्रीन के हवाले हो गए।

स्वतंत्रता के नाम पर इंसान अकेला होता जा रहा है।
रिश्ते होते हुए भी लोग अकेलापन महसूस कर रहे हैं।


आज की पीढ़ी और रिश्तों का दबाव

आज की पीढ़ी बुरी नहीं है,
लेकिन बहुत ज़्यादा दबाव में है।

  • Career pressure

  • Competition

  • Expectations

इन सबके बीच रिश्तों को समय देना मुश्किल हो जाता है।


बातचीत की कमी – रिश्तों की असली मौत

रिश्ते एक दिन में नहीं टूटते।
वे तब टूटते हैं जब बात बंद हो जाती है।

  • सुनना बंद

  • समझना बंद

  • महसूस करना बंद

यहीं से दूरी बढ़ती है।

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धैर्य की कमी और instant culture

आज सब कुछ instant चाहिए:

  • Instant happiness

  • Instant success

  • Instant relationship

लेकिन रिश्तों को समय, समझ और धैर्य चाहिए।
जहाँ धैर्य नहीं, वहाँ रिश्ता नहीं।


शादी और भरोसे का डर

आज शादी जिम्मेदारी नहीं, डर बन गई है।
लोग पहले ही सोच लेते हैं —
“अगर धोखा मिला तो?”

डर रिश्तों की नींव को कमजोर कर देता है।


सच्चाई: रिश्ते नहीं बदले, हम बदल गए

रिश्ते आज भी वही हैं।
बस निभाने वाले बदल गए हैं।

हम:

  • समय नहीं देते

  • माफ नहीं करते

  • समझौता नहीं करते


रिश्तों को मजबूत कैसे बनाएं?

  • खुलकर बात करें

  • सुनना सीखें

  • Ego कम करें

  • तुलना बंद करें

  • मोबाइल से ज़्यादा इंसान देखें

  • रिश्तों को समय दें


निष्कर्ष: रिश्ते आज भी बच सकते हैं

आज के रिश्ते कमजोर इसलिए नहीं हुए क्योंकि दुनिया बदल गई,
बल्कि इसलिए क्योंकि हमारी प्राथमिकताएँ बदल गईं।

अगर हम चाहें तो:

  • रिश्ते फिर मजबूत हो सकते हैं

  • परिवार फिर खुश हो सकते हैं

रिश्ते छोड़ने से नहीं, निभाने से मजबूत होते हैं।

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