नवादा भगवती मंदिर का इतिहास

Table of Contents

नवादा भगवती मंदिर — इतिहास और महत्व

  1. स्थान और पवित्रता

    • नवादा भगवती मंदिर दरभंगा जिला के बेनीपुर प्रखंड में नवादा गाँव में स्थित है।

    • इसे मिथिला क्षेत्र का एक प्रमुख और पवित्र स्थल माना जाता है और यह 52 सिद्ध पीठों में से एक की श्रेणी में आता है।

  2. नाम और देवी का स्वरूप

    • यहाँ देवी हयहट्ट देवी (Hayhat Devi) के सिंहासन की ही पूजा होती है, न कि उनके मूर्ति का आमतः प्रतिरूप।

    • इसके अनुसार पुराणों में कहा जाता है कि सती का वाम स्कन्ध (बांई कंधा) यहीं गिरा था, इसलिए यह स्थान पवित्र माना जाता है।

  3. स्थापना की कथा

    • स्थानीय मान्यता है कि पहले यहाँ राजा हयहट्ट ने भगवती की मूर्ति स्थापित की थी।

    • एक साधक जो हावीडीह गाँव से रोज़ कमला नदी पार कर नवादा आता था, बीमार होने पर भी पूजा करने आया। उसने देवी से अनुरोध किया कि अब वह प्रतिदिन न आ सके।

    • देवी ने स्वप्न में कहा कि मूर्ति को हावीडीह ले जाओ, लेकिन पूजा हेतु नवादा में सिंहासन की आराधना करो। तब से वहां केवल सिंहासन की पूजा होती है।

    • पूजा-पर्व और परंपरा

    • यहाँ साल भर श्रद्धालु आते रहते हैं, लेकिन चारों नवरात्रा में विशेष पूजा होती है।

    • शारदीय नवरात्र (दुर्गा पूजा) में विशेष महत्व है और भक्तों की बहुत भीड़ होती है।

    • मंदिर प्रांगण में एक शांतिपूर्ण, लेकिन तीव्र धार्मिक भावना बनी रहती है।

  4. दीपावली की अनूठी परंपरा

    • नवादा में दीपावली एक दिन पहले मनाई जाती है।

    • इस दिन, गांव के लोग पहले भगवती के मंदिर जाते हैं, वहाँ सिंहासन की पूजा करते हैं (क्योंकि मूर्ति नहीं है) और फिर अपने घरों में दीप जलाते हैं।

    • इस परंपरा की जड़ों को दरभंगा राज महल के इतिहास से जोड़ा जाता है।

  5. माता का प्रतीक और गहरे धार्मिक विश्वास

    • यहाँ देवी की मूर्ति नहीं है, लेकिन सिंहासन को ही देवी का प्रतिनिधि माना जाता है और उसमें ही अनन्य आस्था है।

    • मंदिर धार्मिक न्यास के अधीन है और पूजा-प्रबंधन का व्यवस्था स्थानीय पुरोहित अमरनाथ ठाकुर करते हैं।

    • कहा जाता है कि जो भक्त “सच्चे मन से” पूजा करते हैं, उन्हें मां भगवती मनोभाव से इच्छित फल देती हैं।

  6. सामाजिक और आधुनिक चुनौतियाँ

    • हाल के समय में, मंदिर की सुरक्षा को लेकर स्थानीयों में चिंता रही है।

    • कुछ रिपोर्ट्स में ये बताया गया है कि मंदिर परिसर में चोरी की घटनाएं हुई हैं, और श्रद्धालुओं ने स्थायी पुलिस चौकी की मांग की है।

    • इसके अलावा, 2022 में परिसर में जलभराव (फ्लड) की घटनाएं भी हुई हैं, विशेष रूप से पूजा-समय में भीड़ अधिक होने पर।


पूजा विधि (Puja Vidhi)

निम्नलिखित पूजा-विधि और रीति-रिवाज नवादा भगवती मंदिर के लिए खास माने जाते हैं:

  1. सिंहासन पूजा

    • मुख्य पूजा सिंहासन (तख्त) को ही की जाती है क्योंकि प्रतिमा नहीं है।

    • दिन में लगभग दोपहर 12 बजे से 1 बजे के बीच पुजारी सिंहासन का श्रृंगार करते हैं।

    • यह श्रृंगार फूल, पुष्पांजलि और अन्य पारंपरिक सामग्री से होता है।

  2. नवरात्र पूजा

    • चारों नवरात्र (चैत्र, श्रावण, शारदीय, वसंत) में विशेष आराधना की जाती है।

    • नवरात्रि के समय, स्थानीय और दूर-दराज के श्रद्धालु विशेष मन्नतों के साथ आते हैं।

  3. विशेष भोग-आरती

    • एक बहुत पुरानी परंपरा के अनुसार, निशा पूजा के दिन रात्रि 1 बजे के आसपास अरहुल फूल (या अन्य विशेष फूल) से सिंहासन को सजाया जाता है

    • भोग में 56 (छप्पन) प्रकार के व्यंजन चढ़ाए जाते हैं।

    • भोग लगाने के लिए पास के भगवतपुर गाँव के एक विशेष परिवार का व्यक्ति अनिवार्य रूप से शामिल होता है।

  4. बलि और अर्पण

    • कथाओं में है कि सातमी और अष्टमी को बलि (पशु-बलि) अर्पित की जाती थी, लेकिन यह परंपरा आधुनिक समय में बहुत सीमित या बदली हुई हो सकती है।

    • वर्तमान में बलि की जानकारी कम है, लेकिन आस्था और मन्नतों के लिए श्रद्धालु अब भी यहाँ आते हैं।

  5. मान्यता और फल

    • कहा जाता है कि जो भक्त यहाँ सच्चे मन से पूजा करते हैं, उन्हें इच्छित फल मिलता है।

    • भक्त मनोकामनाओं, विशेष रूप से नवरात्रि में अपने जीवन-संबंधित और आध्यात्मिक मांगों के लिए यहां माँ भगवती की आराधना करते हैं।


प्रमुख उत्सव और अनुष्ठान

  • नवरात्रि (Navratri): चार नवरात्रियों में बड़ी संख्या में भक्त आते हैं।

  • दीपावली: नवादा में दीपावली एक दिन पहले मनायी जाती है — उसी शाम भगवती की सिंहासन पूजा होती है।

  • स्थानीय मेले: महाअष्टमी जैसे दिनों में मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है।


धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

  • 52 सिद्ध पीठ: यह स्थान शक्ति-साधना के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह 52 सिद्ध पीठों में गिना जाता है।

  • मिथिला संस्कृति: मिथिला में देवी-पूजा की परंपरा बहुत गहरी है और नवादा भगवती मंदिर इस सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।

  • आस्था का केंद्र: यहां आने वाले श्रद्धालुओं में यह विश्वास है कि देवी माँ उनकी मन्नतें सुनती हैं और सिंहासन की पूजा से आने वाले मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।

नवादा भगवती मंदिर का इतिहास

नवादा भगवती मंदिर का इतिहास बेहद रोचक और आध्यात्मिक है:

1. राजा हयहट्ट द्वारा स्थापना

कथाओं में वर्णन है कि मिथिला के राजा हयहट्ट ने यहां भगवती का सिंहासन स्थापित किया था।

2. साधक की कथा

एक साधक रोज कमला नदी पार कर नवादा आकर भगवती की पूजा करता था।
बीमारी के कारण वह रोज नहीं आ पाता था।
देवी ने स्वप्न में निर्देश दिया:

“मूर्ति को हावीडीह ले जाओ, पर पूजा सिंहासन पर ही होगी।”

तब से मूर्ति हावीडीह गांव में है और सिंहासन नवादा में।

3. सिंहासन पूजा की परंपरा

यहाँ देवी के सिंहासन को ही स्वरूप माना जाता है।
यह मिथिला में देवी आराधना की सबसे खास परंपरा है।


🙏 नवादा भगवती मंदिर की पूजा विधि

🔸 1. सिंहासन पूजा

  • यहाँ प्रतिमा नहीं होती

  • प्रतिदिन सिंहासन का श्रृंगार किया जाता है

  • फूल, धूप, नैवेद्यम और चढ़ावा अर्पित किया जाता है

🔸 2. नवरात्र पूजा

चारों नवरात्र में यहाँ भारी भीड़ होती है:

  • चैत्र नवरात्र

  • शारदीय नवरात्र

  • श्रावण नवरात्र

  • बसंत नवरात्र

विशेषकर महाअष्टमी को भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं।

🔸 3. भोग और विशेष अनुष्ठान

  • अरहुल फूल और कमल के फूल का विशेष प्रयोग

  • निशा पूजा में रात्रि 1 बजे श्रृंगार

  • 56 प्रकार का छप्पन भोग

  • भोग चढ़ाने का अधिकार एक विशेष परिवार को ही है

🔸 4. बलि की परंपरा

पुराने समय में अष्टमी और सप्तमी पर बलि दी जाती थी,
हालांकि अब यह प्रथा सीमित रूप में ही रहती है।


🪔 दीपावली एक दिन पहले क्यों मनाई जाती है?

नवादा गांव में दीपावली एक दिन पहले मनाने की अनूठी परंपरा है।

कारण:
– पहले देवी की पूजा होती है
– फिर गांव के लोग अपने घरों में दीप जलाते हैं
– यह परंपरा सदियों से चली आ रही है
– इसे “नवादा दीपावली” भी कहा जाता है

यह मिथिला की अनोखी शक्ति-उपासना का प्रतीक है।


🌟 नवादा भगवती मंदिर का महत्व

✔ 52 सिद्ध पीठों में शामिल

✔ देवी सती के अंश का स्थान

✔ प्रतिमा रहित परंपरा – सिर्फ सिंहासन पूजा

✔ मनोकामना पूरी होने की प्रसिद्ध शक्ति-पीठ

✔ मिथिला की धार्मिक पहचान का गर्व

यहाँ आने वाले भक्त कहते हैं:

“नवादा भगवती मइया सच्चे मन से माँगी मुराद पूरा कर देती हैं।”


🚩 मंदिर का वातावरण

  • शांत, पवित्र और ऊर्जा से भरा

  • चारों ओर प्राकृतिक सौंदर्य

  • नवरात्र में मेले जैसा माहौल

  • भक्तों की निरंतर आवाजाही


📍 कैसे पहुँचें? – Nawada Bhagwati Mandir Location

जिला: दरभंगा
प्रखंड: बेनीपुर
गांव: नवादा
पास की जगहें:

सड़क मार्ग से यहाँ आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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