Mosidha Gaav बिहार राज्य के उत्तर भाग में स्थित सीतामढ़ी जिले का एक शांत, सुंदर और सांस्कृतिक गाँव है। यह गाँव मिथिला सभ्यता की जड़ों को अपने अंदर समेटे हुए है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, ग्रामीण जीवन, धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति इस क्षेत्र की असली पहचान है। गाँव में जीवन सरल है, लोग मेहनती हैं और सामाजिक एकता का भाव बहुत गहरा है।
यहाँ की बोली मैथिली है, और अधिकांश लोग अपनी परंपराओं और रीति-रिवाजों को संजोकर रखते हैं। यही कारण है कि Mosidha Gaav आज भी मिट्टी, संस्कृति और पारंपरिक लोकगीतों से भरा एक जीवंत गाँव माना जाता है।
Mosidha Gaav का इतिहास मिथिला साम्राज्य से जुड़ा हुआ है। यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही विद्या, कला, संस्कृति और आध्यात्मिकता का केंद्र रहा है। माना जाता है कि यह गाँव कभी जनकपुर के सांस्कृतिक प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा था।
पुरानी पीढ़ियाँ बताती हैं कि यह इलाका पहले घने जंगल, बड़े-बड़े तालाब और प्राकृतिक संसाधनों से भरा हुआ था। धीरे–धीरे यहाँ लोगों ने बसावट की, खेती शुरू की और समय के साथ यह एक स्थायी गाँव के रूप में विकसित हुआ।
यह क्षेत्र प्राचीन मिथिला जनक राज के प्रभाव में रहा।
यहाँ खेती-किसानी सदियों से मुख्य आजीविका रही है।
बाढ़ के कारण मिट्टी उपजाऊ बनती रही, जिससे धान, गेहूँ, सरसों और दालों की खेती खूब हुई।
लोकगीत, सामा-चकेवा, झिझिया जैसे पर्व सदियों से यहाँ मनाए जाते हैं।
यहाँ के लोग पारंपरिक मैथिली संस्कृति, रीति-रिवाज और लोक-कथाओं को आज भी जीवित रखते हैं।
इतिहास के अनुसार, गाँव में कई परिवार 100–150 वर्षों से ज्यादा समय से निवास कर रहे हैं। कई प्राचीन पूजा स्थल, पुराने पेड़, और भूमि संरचनाएँ इस गाँव के अतीत की गवाही देती हैं।
Mosidha Gaav धार्मिक आस्था वाले लोगों का गाँव है। यहाँ कई छोटे-बड़े मंदिर मौजूद हैं, जहाँ प्रतिदिन पूजा-पाठ होता है और त्योहारों के समय खास कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
गाँव में एक प्रमुख प्राचीन देवीस्थान है, जो ग्रामीणों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। नवरात्रि, दुर्गा पूजा और अन्य त्योहारों पर यहाँ विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और प्रसाद का आयोजन होता है। गाँव के लोग मानते हैं कि देवी की कृपा से गाँव में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
गाँव में एक छोटा मगर अत्यंत पवित्र शिव मंदिर है। शिवरात्रि, सावन महीने और सोमवार के दिन श्रद्धालुओं की भीड़ यहाँ उमड़ती है। ग्रामीण लोग यहाँ जल–अभिषेक करते हैं और विशेष पूजा करवाते हैं।
गाँव के कई परिवारों के अपने-अपने कुल देवता स्थल हैं। विवाह, उपनयन, मुंडन जैसे पारंपरिक संस्कारों में इन स्थलों का विशेष महत्व होता है।
Mosidha Gaav में छठ पूजा सबसे बड़े त्योहार के रूप में मनाया जाता है। गाँव के तालाब, पोखरों और नदी किनारे छठ घाट बनते हैं, जहाँ हजारों श्रद्धालु सूर्य की उपासना करते हैं।
Mosidha Gaav अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सामाजिक एकता के लिए जाना जाता है।
✔ खेती-किसानी मुख्य आजीविका
✔ सामाजिक सौहार्द और पारिवारिक संस्कृति
✔ मिथिला कला और लोकगीतों का मुख्य केंद्र
✔ सामा-चकेवा, झिझिया, हरछठ, मधुश्रावणी जैसे पर्व बड़े धूमधाम से
✔ छठ पूजा गाँव का मुख्य त्योहार
✔ प्राकृतिक वातावरण, साफ हवा और शांत जीवन
✔ लोककला, पनरसा गीत, विवाह परंपराओं का पालन
राज्य: बिहार
जिला: सीतामढ़ी
भाषा: मैथिली
नज़दीकी रेलवे स्टेशन: Sitamarhi Junction (50–55 km लगभग)
जलवायु: गर्मियों में तेज गर्मी, सर्दियों में हल्की ठंड और मानसून में उपजाऊ मिट्टी
गाँव मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र में स्थित है, जहाँ मिट्टी उपजाऊ है। मानसून के समय यहाँ खूब हरियाली दिखाई देती है।
Mosidha Gaav की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है।
धान, गेहूँ, मक्का, दालें प्रमुख फसलें
सरसों एवं तिलहन की खेती
पशुपालन – गाय, भैस, बकरी
दूध उत्पादन और स्थानीय व्यवसाय
इसके साथ कई लोग व्यापार, सेवा और बाहर नौकरी करके अपनी आय बढ़ाते हैं।
इस गाँव में मिथिला की संस्कृति हर घर में जीवित है।
विवाह में पनरसा गीत, संझा-गीत, सुगन-गीत
सामा-चकेवा में लड़कियाँ मिट्टी की मूर्तियाँ सजाती हैं
मधुश्रावणी पर्व दंपतियों का विशेष त्योहार
झिझिया में दीपक वाले मिट्टी के घड़े लेकर नृत्य
लोककला – मधुबनी पेंटिंग का असर भी दिखता है
यह गाँव पूरी तरह से सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र है।
गाँव में प्राथमिक विद्यालय और पास में हाई स्कूल उपलब्ध है।
स्वास्थ्य केंद्र, आँगनवाड़ी और पंचायत भवन भी मौजूद है।
सड़क और बिजली की व्यवस्था लगातार विकसित हो रही है।
Mosidha Gaav Sitamarhi सिर्फ कृषि और संस्कृति के लिए ही नहीं, बल्कि Maithili Film, Comedy Video, Short Film और Album Shooting के लिए भी बेहद प्रसिद्ध होता जा रहा है। गाँव की प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण, खुले खेत, पोखर, गाँव की गलियाँ और पारंपरिक मिथिला बैकग्राउंड इसे शूटिंग के लिए एक परफेक्ट लोकेशन बनाते हैं।
यहाँ कई मशहूर मैथिली कलाकार, जैसे—
अपनी कॉमेडी वीडियो, एल्बम सांग और शॉर्ट फिल्मों की शूटिंग कर चुके हैं। गाँव के लोग बताते हैं कि Mosidha Gaav की लोकेशन्स इतनी आकर्षक और नेचुरल हैं कि कैमरे में उनका रंग बिल्कुल वास्तविक और सुंदर दिखता है। यही वजह है कि कई यूट्यूब क्रिएटर्स, मैथिली प्रोडक्शन टीमें और कलाकार यहाँ बार-बार शूट करने आते हैं।
खुले आँगन, मिट्टी के घर, धान के खेत, नदी किनारा और गाँव के प्राकृतिक दृश्य मैथिली संस्कृति को असली रूप में दिखाने के लिए बहुत उपयुक्त माने जाते हैं। इसलिए Mosidha Gaav आज मिथिला रीजन का एक उभरता हुआ शूटिंग स्पॉट बन चुका है।
Mosidha Gaav Sitamarhi की एक और खास पहचान है—यहाँ का स्थानीय Mithila Film Production, जिसे प्रतिभाशाली कलाकार Manish Mishra चलाते हैं। यह प्रोडक्शन हाउस मैथिली फिल्म, कॉमेडी वीडियो, शॉर्ट फिल्म, एल्बम सांग और सांस्कृतिक कंटेंट बनाने में लगातार सक्रिय है।
Manish Mishra ने गाँव से ही तमाम युवा कलाकारों को प्लेटफॉर्म दिया है और मिथिला संस्कृति को डिजिटल दुनिया में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इस प्रोडक्शन के जरिए—
गाँव में शूटिंग होती है
स्थानीय कलाकारों को मौका मिलता है
मैथिली कॉमेडी और सांस्कृतिक वीडियो बनाए जाते हैं
कई लोकप्रिय वीडियो यूट्यूब पर वायरल हुए हैं
Mithila Film Production के कारण Mosidha Gaav आज एक उभरता हुआ फिल्म निर्माण केंद्र बन चुका है, जहाँ हर महीने नए कलाकार, निर्देशक और टेक टीम शूटिंग के लिए आते हैं। इससे गाँव का नाम न सिर्फ Sitamarhi बल्कि पूरे Mithila क्षेत्र में तेजी से फैल रहा है।
Mosidha Gaav की धार्मिक पहचान में ब्रह्मस्थान (Bramasthan) का विशेष स्थान है। यह गाँव का सबसे पवित्र स्थल माना जाता है, जहाँ ग्रामीण लोग पूजा-अर्चना, हवन, संकल्प और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। ब्रह्मस्थान को गाँव की सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र माना जाता है।
त्योहारों, धार्मिक कार्यक्रमों और शुभ कार्यों से पहले लोग यहाँ आशीर्वाद लेने अवश्य आते हैं। सुबह-शाम दीप प्रज्वलन और पूजा से यह स्थान पूरे गाँव में शांति, सद्भाव और आध्यात्मिकता का संदेश फैलाता है।
गाँव के बुजुर्ग बताते हैं कि ब्रह्मस्थान कई वर्षों पुराना है और इसे “ग्राम–शांति” का मूल केंद्र माना जाता है। यही कारण है कि Mosidha Gaav के हर बड़े कार्यक्रम की शुरुआत ब्रह्मस्थान पूजा से होती है।
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