मैथिली नई पीढ़ी क्यों नहीं बोल रही, यह आज पूरे मिथिला समाज के सामने सबसे बड़ा सवाल बन गया है। भाषा सिर्फ शब्दों का समूह नहीं होती, यह एक पूरे समाज की आत्मा, संस्कृति और पहचान का दर्पण होती है। मैथिली भाषा भी ऐसी ही एक समृद्ध, मधुर और ऐतिहासिक विरासत है, जिसमें सैकड़ों वर्षों की सभ्यता, परंपरा और साहित्य सहेजा हुआ है। मिथिला का गौरव, विद्वानों की मातृभाषा और जन-जीवन की सहज अभिव्यक्ति — मैथिली आज अपनी पहचान को बचाए रखने की जद्दोजहद से गुजर रही है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि नई पीढ़ी मैथिली क्यों नहीं बोल रही, और यह केवल एक भाषाई समस्या नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक चुनौती बनती जा रही है। नई पीढ़ी का अपनी मातृभाषा से दूर होना एक गहरी समस्या का संकेत है, जिसे समझना और सुधारना बेहद आवश्यक है।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि आखिर मैथिली नई पीढ़ी क्यों नहीं बोल रही, इसके पीछे कौन-कौन से सामाजिक, पारिवारिक, शैक्षणिक और आर्थिक कारण छिपे हैं। साथ ही यह भी देखेंगे कि मिथिला समाज अपनी भाषा को कैसे बचा सकता है और भविष्य में मैथिली का रूप कैसा होगा।
1. बदलती मानसिकता और “शर्म” की भावना
कई युवा मैथिली बोलने में झिझक महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि मैथिली बोलना उन्हें “देहाती” या “अनपढ़” दिखा सकता है।
यह गलत सोच धीरे-धीरे गहरी होती जा रही है।
क्यों आती है यह शर्म?
स्कूलों में मैथिली माध्यम का अभाव।
माता-पिता का घर में मैथिली कम बोलना।
हिंदी–अंग्रेजी को “स्टेटस” भाषा मानना।
सोशल मीडिया का प्रभाव।
युवा सोचते हैं कि हिंदी और अंग्रेजी बोलना “कूल” है, जबकि मैथिली पुरानी भाषा है। यही वजह है कि मैथिली नई पीढ़ी क्यों नहीं बोल रही — इसका पहला बड़ा कारण यही मानसिकता है।
मैथिली नई पीढ़ी क्यों नहीं बोल रही,
2. माता-पिता का बदलता रवैया
पहले घर-घर में मैथिली बोली जाती थी, लेकिन अब माता-पिता डरते हैं कि मातृभाषा से बच्चे “पिछड़े” दिखेंगे।
जब माता-पिता ही मैथिली में नहीं बोलते, तो बच्चे कैसे सीखेंगे?
आज यह चर्चा तेज़ है कि मैथिली नई पीढ़ी क्यों नहीं बोल रही, और इसका मुख्य कारण घर का बदलता माहौल है।
3. शिक्षा प्रणाली और मैथिली का अभाव
मैथिली को स्कूलों में पर्याप्त जगह नहीं मिलती।
न शिक्षक, न किताबें — बच्चों को भाषा से जुड़ने का अवसर ही नहीं मिलता।
एक भाषा तभी जीवित रहती है जब वह पढ़ाई का हिस्सा हो। यही वजह से नई पीढ़ी मैथिली क्यों नहीं बोल रही, इसका एक बड़ा कारण शिक्षा भी है।
4. शहरीकरण का प्रभाव
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे शहरों में रहने वाले बच्चों को मैथिली बोलने का माहौल नहीं मिलता।
घर के बाहर पूरा वातावरण हिंदी–अंग्रेजी का होता है।
धीरे-धीरे बच्चों की प्राथमिक भाषा बदल जाती है और मैथिली नई पीढ़ी क्यों नहीं बोल रही, इसका स्पष्ट असर शहरी जीवन में दिखता है।
5. सोशल मीडिया और मनोरंजन का बदलता स्वरूप
YouTube, Instagram, Netflix — सब हिंदी और अंग्रेजी में।
मैथिली कंटेंट बहुत कम।
जब बच्चों को पसंदीदा कंटेंट अपनी भाषा में ही न मिले, तो वे भाषा के करीब कैसे आएँ?
यही कारण मैथिली नई पीढ़ी क्यों नहीं बोल रही का आधुनिक पहलू है।
6. रोजगार और करियर का दबाव
अंग्रेजी को करियर की भाषा मान लिया गया है।
माता-पिता सोचते हैं कि मातृभाषा समय की बर्बादी है।
लेकिन यह सोच गलत है।
बच्चा कई भाषाएँ सीख सकता है और मातृभाषा उसकी भावनात्मक नींव होती है।
7. घरेलू माहौल — भाषाई विरासत का टूटना
संयुक्त परिवार टूटने से दादी–नानी की कहानियाँ और संस्कार दूर हो गए, जो मैथिली सिखाने का सबसे बड़ा स्रोत थे।
8. मिथिला समाज का कमजोर भाषाई अभियान
अन्य भाषाओं की तरह बड़े स्तर पर अभियान नहीं चलाए गए।
इसका असर स्पष्ट दिखता है।
मैथिली क्यों जरूरी है?
पहचान
भावनाएँ
संस्कृति
साहित्य
मैथिली छोड़ देना अपने इतिहास को खो देना है।
सार रूप में — मैथिली नई पीढ़ी क्यों नहीं बोल रही?
✔ मातृभाषा को कमतर समझना
✔ माता-पिता का न बोलना
✔ शिक्षा में अभाव
✔ सोशल मीडिया का प्रभाव
✔ माइग्रेशन
✔ संयुक्त परिवार का टूटना
✔ सांस्कृतिक गर्व की कमी
✅ समाधान — नई पीढ़ी को मैथिली से कैसे जोड़ें?
✔ घर में बोलें
✔ आधुनिक मैथिली कंटेंट बनाएं
✔ स्कूलों में विषय की मांग करें
✔ सोशल मीडिया पर मैथिली ट्रेंड करें
✔ त्योहार–विवाह में मैथिली का प्रयोग बढ़ाएँ
✔ डिजिटल ऐप और e-learning उपलब्ध कराएँ
मैथिली नई पीढ़ी क्यों नहीं बोल रही
निष्कर्ष
“मैथिली नई पीढ़ी क्यों नहीं बोल रही” केवल एक सवाल नहीं, यह चेतावनी है।
लेकिन रास्ता साफ है — अगर हम घर में बोलें, बच्चों को सिखाएँ, और गर्व महसूस करें, तो मैथिली आने वाली पीढ़ियों तक चमकती रहेगी।
















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