हिंदू धर्म के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, जिसे श्रीकृष्ण जयंती, गोकुलाष्टमी, और अष्टमी रोहिणी के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार उस दिव्य रात को स्मरण करता है, जब भगवान विष्णु ने अपने आठवें अवतार श्रीकृष्ण के रूप में पृथ्वी पर जन्म लिया था।
जन्माष्टमी आध्यात्मिकता, भक्ति, प्रेम, त्याग, धर्म और मानवता की एक अद्भुत संगम का प्रतीक है। इस दिन मंदिरों, घरों, आश्रमों, गांवों और शहरों में भक्ति का अद्भुत वातावरण बन जाता है।
2027 में जन्माष्टमी की तिथि:
मुख्य पूजा और निशीथ (मध्यरात्रि) पूजा इसी दिन की जाएगी।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी जन्माष्टमी की तिथि हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को निर्धारित की गई है।
जन्माष्टमी, श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव है। भगवान कृष्ण का जन्म कंस के अत्याचार से मुक्ति दिलाने और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए हुआ।
इस दिन भक्त:
व्रत रखते हैं
भगवान का अभिषेक करते हैं
भजन-कीर्तन करते हैं
झूला सजाते हैं
मंदिरों में दर्शन करते हैं
आधी रात को जन्म-आरती करते हैं
इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण क्षण है—
रात्रि 12 बजे श्रीकृष्ण का जन्म-समय।
जन्माष्टमी कई कारणों से महत्वपूर्ण है:
भगवान कृष्ण का अवतार धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए हुआ।
उन्होंने कंस, शिशुपाल और कई अत्याचारियों का नाश कर मानवता को बचाया।
कृष्ण का पूरा जीवन—
गीता का ज्ञान
प्रेम
करुणा
कर्मयोग
भक्ति
इन सबका संगम है।
माखन चोरी
गोवर्धन पूजा
गोकुल की बाल लीलाएँ
रासलीला
गीता का उपदेश
अर्जुन को कर्म का ज्ञान
इन सभी के कारण श्रीकृष्ण सबसे प्रिय देवता माने जाते हैं।
श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा की कारागार में हुआ था।
उनके माता-पिता थे— देवकी और वसुदेव।
देवकी का भाई कंस अत्याचारी राजा था।
एक भविष्यवाणी हुई कि देवकी का आठवाँ पुत्र कंस का अंत करेगा।
कंस ने देवकी-वसुदेव को जेल में डाल दिया और उनके सात पुत्रों को मार दिया।
लेकिन आठवाँ पुत्र (कृष्ण) जन्म लेते ही दिव्य लीला के कारण सुरक्षित गोकुल पहुंचा।
यही दिव्य घटना जन्माष्टमी के मुख्य संदेश को प्रकट करती है:
“सत्य और धर्म की जीत होती है, और अधर्म का अंत अवश्य होता है।”
2027 में जन्माष्टमी के लिए प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार है:
24 अगस्त 2027 (रात)
25 अगस्त 2027 (मध्यरात्रि के बाद)
25 अगस्त 2027 की रात (मध्यरात्रि)
26 अगस्त 2027 (सुबह अष्टमी समाप्त होने के बाद)
नीचे मैं आपको घर या मंदिर दोनों के लिए आसान पूजा-विधि दे रहा हूँ:
घर साफ करें
मंदिर या पूजा-स्थान सजाएँ
फूलों और लाइट से सजावट
झूला तैयार करें
कृष्ण बालरूप सजाएँ
कई भक्त निर्जला व्रत रखते हैं, कुछ फलाहार लेते हैं।
दीप जलाएँ
भगवान की प्रतिमा को स्नान कराएँ
दूध, दही, घी, शहद, शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें
केसर और चंदन लगाएँ
फूल अर्पित करें
यह जन्म का क्षण माना जाता है।
इस समय:
घंटी देती जाती है
शंख बजता है
“कन्हैया लाल की जय” का नारा गूंजता है
बालकृष्ण का जन्म कर झूला झुलाया जाता है
इस दिन मंदिरों और घरों में
रासलीला
झांकियाँ
भजनों का कार्यक्रम
विशेष रूप से रात तक चलता रहता है।
माखन-मिश्री
पंजीरी
फल
पंचामृत
ये प्रसाद रूप में बांटे जाते हैं।
यहाँ जन्माष्टमी सबसे भव्य रूप में मनाई जाती है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर
बांके बिहारी मंदिर
इस्कॉन मंदिर
में लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
यहाँ जन्माष्टमी को दही-हांडी के साथ मनाया जाता है।
युवा मानव पिरामिड बनाकर ऊँचाई पर लटकी मटकी फोड़ते हैं।
द्वारकाधीश मंदिर में विशेष पूजा, झंडा-वंदन और रातभर भजन होता है।
कृष्ण को नारियल, चावल, पायसम, मिठाई और तुलसी चढ़ाई जाती है।
गांवों-कस्बों में झांकियाँ, भजन, झूला-झुलन और सामूहिक पूजा का आयोजन होता है।
जन्माष्टमी सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि आध्यात्मिक सीख है:
मन को शुद्ध करती है
भक्ति और प्रेम की भावना जगाती है
ध्यान और मनन को बढ़ाती है
परिवार और समाज में एकता बढ़ती है
नकारात्मकता दूर होती है
जीवन में कर्मयोग और धर्म का मार्ग सिखाती है
कृष्ण की गीता का मुख्य संदेश—
“कर्म कर, फल की चिंता मत कर।”
आज भी जीवन को सार्थक बनाता है।
बुधवार का दिन शुभ माना जाता है
ज्योतिष अनुसार इस वर्ष अष्टमी का योग अत्यंत पवित्र रहेगा
मंदिरों में कई विशेष कार्यक्रम होंगे
ISKCON और अन्य संस्थाओं में अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम होंगे
डिजिटल युग के कारण लाइव दर्शन व वर्चुअल कीर्तन जोड़ेंगे अधिक भक्तों को
2027 की जन्माष्टमी 25 अगस्त (बुधवार) को मनाई जाएगी।
यह दिन भक्ति, प्रेम, श्रद्धा और अध्यात्म का महासंगम है।
श्रीकृष्ण का जन्म, उनकी लीलाएँ, गीता का उपदेश और जीवन का दर्शन इस पर्व को अनंत और अद्वितीय बनाता है।
जन्माष्टमी वह दिन है जब—
✨ मनुष्य भक्ति से भर जाता है
✨ भगवान कृष्ण का प्रेम हर हृदय में जाग उठता है
✨ मंदिरों-घरों में भजन और खुशी की ध्वनि गूंजती है
✨ धर्म और सत्य की विजय का संदेश फिर जीवित होता है
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