2026 में जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी?

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2026 में जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी? जन्माष्टमी 2026 की तिथि, महत्व, पूजा-विधि, शुभ मुहूर्त और पूरे भारत में कैसे मनाया जाता है

भारत एक ऐसा देश है जहाँ हर त्यौहार अपने साथ नई ऊर्जा, आस्था और संस्कार लेकर आता है। इन्हीं महान पर्वों में एक महत्वपूर्ण और अत्यंत पवित्र पर्व है—श्रीकृष्ण जन्माष्टमी। यह वह दिन है जब प्रेम, भक्ति, संगीत, ज्ञान और धर्म के प्रतीक भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ था। हर वर्ष भक्त बड़े उत्साह, श्रद्धा और उल्लास के साथ जन्माष्टमी मनाते हैं।

लेकिन 2026 में जन्माष्टमी कब है? उस दिन के शुभ मुहूर्त क्या हैं? जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है? किस प्रकार पूजा-विधि होती है? और भारत के विभिन्न राज्यों में यह पर्व कैसे मनाया जाता है?

इस पूरे लेख में आपको हर वह जानकारी मिलेगी जो आपको 2026 की जन्माष्टमी और उससे जुड़े आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक पहलुओं के बारे में जाननी चाहिए।


1. 2026 में जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी?

पंचांग के अनुसार:

2026 में जन्माष्टमी की तिथि – 4 सितंबर 2026 (शुक्रवार)

अधिकांश कैलेंडर, पूजा-पंचांग और ज्योतिष गणना के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर 2026 को पड़ रही है। इसीलिए भारत के कई क्षेत्रों में जन्माष्टमी इसी दिन मनाई जाएगी।

कुछ वैष्णव / ISKCON परंपरा – 5 सितंबर 2026 (शनिवार)

कुछ परंपराओं में तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र और निशीथ काल को प्रमुखता दी जाती है। इसलिए कई मंदिरों, विशेषकर वैष्णव, इस्कॉन (ISKCON) और कई दक्षिण भारतीय मठों में जन्माष्टमी 5 सितंबर 2026 को भी मनाई जा सकती है।

संक्षिप्त सार

  • स्मार्त / गृहस्थ परंपरा: 4 सितंबर 2026

  • वैष्णव / ISKCON परंपरा: 5 सितंबर 2026


2. जन्माष्टमी क्या है? (Krishna Janmashtami Meaning)

जन्माष्टमी, जिसे गोकुलाष्टमी, कृष्ण जन्मोत्सव, जन्माश्टमी भी कहा जाता है, भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिवस है।

यह पर्व केवल जन्मदिन नहीं है, बल्कि—

  • धर्म की पुनर्स्थापना,

  • अधर्म का विनाश,

  • न्याय की स्थापना,

  • प्रेम, ज्ञान और भक्ति का प्रसार
    का पर्व है।

श्रीकृष्ण ने आध्यात्मिक रूप से, सामाजिक रूप से और राजनीतिक रूप से मानवता को एक नई दिशा दी।

उनकी सीख – “कर्म करो, फल की चिंता मत करो” – आज भी सबसे महान जीवन-मंत्रों में से एक है।


3. जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है? (Why Janmashtami is Celebrated)

श्रीमद्भागवत और पुराणों के अनुसार, द्वापर युग में अत्याचार, पाप और दुष्ट शासन के बढ़ने के कारण देवताओं ने भगवान विष्णु से पृथ्वी पर अवतार लेने की प्रार्थना की।

तभी भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में गर्भ धारण किया—

  • माता देवकी और

  • वसुदेव जी के घर
    मथुरा के कारागार में।

श्रीकृष्ण का जन्म हुआ—

  • भाद्रपद मास

  • कृष्ण पक्ष

  • अष्टमी तिथि

  • रोहिणी नक्षत्र

  • निशीथ (मध्यरात्रि) काल
    में।

उनका जन्म कंस जैसे अत्याचारी राजा का अंत करने के लिए हुआ था।

जन्माष्टमी मनाने के मुख्य कारण:

  1. श्रीकृष्ण के अवतरण का स्मरण

  2. धर्म की स्थापना का उत्सव

  3. उनके उपदेशों (गीता) को याद करना

  4. भक्ति, प्रेम और करुणा की शक्ति को स्वीकार करना

  5. जीवन में संतुलन, न्याय और सदाचार को अपनाना

इस दिन भक्त व्रत, पूजा, कीर्तन, कथा, झाँकी, दही-हांडी आदि करते हैं।


4. 2026 जन्माष्टमी शुभ मुहूर्त (Janmashtami 2026 Shubh Muhurat)

अष्टमी तिथि – 4 सितंबर 2026
निशीथ काल – रात 11:57 PM से 12:44 AM तक
कृष्ण जन्म मुहूर्त – रात 12:19 AM (लगभग)

(ध्यान: स्थान के आधार पर मुहूर्त थोड़ा बदल सकता है)

इस समय श्रीकृष्ण जन्म-क्षण माना जाता है। भक्त इसी दौरान झूला झुलाते हैं, आरती गाते हैं और उत्सव मनाते हैं।


5. जन्माष्टमी की पूजा-विधि (Janmashtami Puja Vidhi)

🌼 1. व्रत (उपवास)

जन्माष्टमी के दिन अधिकांश श्रद्धालु निर्जला उपवास रखते हैं।
कुछ लोग फलाहार भी लेते हैं।

🌼 2. घर और मंदिर की साफ-सफाई

सुबह से घर को साफ कर सजाया जाता है।
कृष्ण झूला, शृंगार थाल, माखन-मिश्री, पुष्प आदि तैयार किए जाते हैं।

🌼 3. भगवान कृष्ण का शृंगार

  • पीतांबर वस्त्र

  • मोरपंख मुकुट

  • बांसुरी

  • तिलक

  • फूल-माला

  • नंदलाल की झांकी

बहुत सुंदर तरीके से सजाई जाती है।

🌼 4. पवित्र जल से स्नान (अभिषेक)

  • दूध

  • दही

  • घी

  • शहद

  • गंगाजल

से बालकृष्ण का अभिषेक किया जाता है।

🌼 5. मध्यरात्रि पूजा – मुख्य पूजा

निशीथ काल में—

  • कपूर-दीप

  • धूप

  • गंध

  • अक्षत

  • पंचामृत

  • माखन-मिश्री

  • तुलसी-दल

अर्पित किए जाते हैं।

🌼 6. आरती

“ओम जय जगदीश हरे”
“गोपाल कृष्ण कहे का रोना…”
“मैं तो गोविंद गुन गाऊँ…”

जैसे भक्ति गीत गाए जाते हैं।

🌼 7. दही-हांडी / मटकी फोड़

विशेष रूप से महाराष्ट्र में।
यह कृष्ण के माखन-चोरी रूप का प्रतीक है।

🌼 8. अगले दिन व्रत का पारण

अष्टमी के बाद नवमी तिथि में व्रत खोला जाता है।


6. जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व (Spiritual Significance)

अवतार का महत्व

कृष्ण एकमात्र ऐसे अवतार हैं जिन्हें पूर्ण अवतार कहा जाता है।

गीता का ज्ञान

भगवद्गीता मानव जीवन का मार्गदर्शन करती है।
कृष्ण का उपदेश आज भी विश्व के लिए अमूल्य है।

प्रेम और भक्ति

राधा-कृष्ण की प्रेम-भक्ति अद्वितीय मानी जाती है।

नीति, कूटनीति और धर्म

कृष्ण भारतीय राजनीति और सामाजिक व्यवस्था के महान सुधारक थे।

नर्मता और वीरता का संगम

कृष्ण जितने कोमल थे, उतने ही वीर और पराक्रमी भी।


7. भारत के विभिन्न भागों में जन्माष्टमी कैसे मनाई जाती है?

भारत में जन्माष्टमी अलग-अलग रीति-रिवाजों और परंपराओं से मनाई जाती है।


🇮🇳 1. उत्तर भारत (Mathura–Vrindavan, Delhi, UP, Bihar)

🔹 मथुरा

  • यहां कृष्ण जन्मभूमि मंदिर में भव्य उत्सव होता है

  • हजारों भक्त पूरी रात लाइन में रहते हैं

  • महाअभिषेक, झांकियाँ, कीर्तन

  • सुरक्षा के कड़े इंतजाम

  • नंदोत्सव का विशेष आयोजन

🔹 वृंदावन

  • प्रेम मंदिर और इस्कॉन मंदिर जगमगा उठते हैं

  • लाइट शो, झूला महोत्सव

  • हजारों विदेशी भक्त

🔹 दिल्ली और उत्तर प्रदेश

  • बड़े मंदिरों में रासलीला

  • कृष्ण झूला उत्सव

  • लाखों भक्तों का आगमन

🔹 बिहार (विशेषकर मधुबनी, दरभंगा, पटना)

  • सुबह से रासलीला

  • खेतों में मटकी-फोड़ प्रतियोगिता

  • घर-घर प्रसाद वितरण

  • महिलाएँ झांझ-घंटी बजाकर पूजा करती हैं


🇮🇳 2. महाराष्ट्र

दही-हांडी

महाराष्ट्र में जन्माष्टमी को मुख्यतः गोविंदा और दही-हांडी के रूप में मनाया जाता है।

  • 7 से 9 मंज़िल मानव पिरामिड

  • दही की मटकी फोड़ना

  • लाखों की इनामी प्रतियोगिताएँ

  • मुंबई और ठाणे में सबसे बड़ी भीड़


🇮🇳 3. गुजरात

द्वारका में विशाल उत्सव

श्रीकृष्ण का शहर द्वारका जन्माष्टमी पर्व का केंद्र है।

  • द्वारकाधीश मंदिर की भव्य आरती

  • समुद्री तटीय झांकियाँ

  • सांस्कृतिक कार्यक्रम

  • 24 घंटे का कीर्तन


🇮🇳 4. दक्षिण भारत (कर्नाटक, आंध्र, तमिलनाडु)

उड़ीपी कृष्ण मंदिर

  • उड़ीपी में कृष्ण जन्माष्टमी विशेष रूप से मनाई जाती है

  • कृष्ण की जूठी मिट्टी खाने की कथा पर आधारित अनुष्ठान

तमिलनाडु

  • घरों में चावल का पाउडर से पैर बनाए जाते हैं

  • “कृष्ण आएंगे” का प्रतीक


🇮🇳 5. पूर्वोत्तर भारत (मणिपुर, असम)

मणिपुर में जन्माष्टमी बेहद भव्य होती है।

  • मनिपुरी नृत्य

  • मंदिरों में कीर्तन

  • रात भर भजन


🇮🇳 6. राजस्थान और मध्य प्रदेश

  • झांकियाँ

  • रासलीला

  • माखन-मिश्री का वितरण

  • मंदिरों में पारंपरिक वाद्य


8. 2026 की जन्माष्टमी—क्या विशेष रहेगा?

2026 की जन्माष्टमी इसलिए विशेष है क्योंकि—

  • 4–5 सितंबर, दो-दिन का उत्सव

  • शुक्रवार–शनिवार का संयोजन

  • कई जगहों पर अवकाश की संभावना

  • मंदिरों में बड़े कार्यक्रम

  • पर्यटन स्थलों पर भारी भीड़

  • इस्कॉन की विशेष व्यवस्थाएँ


9. जन्माष्टमी का आधुनिक महत्व

आज के समय में जन्माष्टमी हमें सिखाती है—

✔ धर्म का मार्ग चुनें
✔ कर्म पर ध्यान दें
✔ क्रोध, घृणा, ईर्ष्या दूर करें
✔ प्रेम, करुणा, भक्ति अपनाएँ
✔ परिवार और समाज के लिए उपयोगी बनें


10. निष्कर्ष (Conclusion)

2026 में जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 (अधिकांश भारत) और 5 सितंबर 2026 (वैष्णव परंपरा) को मनाई जाएगी।
यह पवित्र पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि मानवता, प्रेम, न्याय और भक्ति का संदेश देने वाला महान दिन है।

पूजा-विधि, मुहूर्त, रासलीला, दही-हांडी, कीर्तन और झांकियों के साथ यह त्योहार भारत की सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है।

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