होली पर निबंध (Maithili) | रंग आ खुशीयाँक महान पर्व – आसान भाषा मे

23597f75754847b289ec6d3f17e29560

होली पर निबंध मैथिली भाषा मे लिखल ई लेख रंग, प्रेम आ भाईचारा के महान पर्व होलीक महत्व के आसान तरीका सँ समझाबैत अछि। होली भारतक प्रमुख पर्व अछि जे हर साल फागुन महीना मे बहुत उत्साह सँ मनायल जाएत अछि।

होली भारतक एक बहुत प्रसिद्ध आ खुशीयाँ सँ भरल पर्व अछि। ई पर्व हर साल फागुन महीना मे मनायल जाएत अछि। जखन जाड़क मौसम खत्म होए लगैत अछि आ बसंत ऋतु शुरू होइत अछि, तखन चारू तरफ प्रकृति बहुत सुंदर देखाइत अछि। गाछ-पात पर नया पत्ता निकलैत अछि, फूल खिलैत अछि आ मौसम सुहावन भ’ जाएत अछि। एहन सुंदर समय मे होलीक पर्व मनायल जाएत अछि, जाहि कारण ई पर्व खुशी आ उमंगक प्रतीक मानल जाएत अछि।

होलीक पर्व प्रेम, भाईचारा आ मेल-मिलापक संदेश दैत अछि। ई दिन लोक आपस मे गिला-शिकवा भुला कए एक-दोसराक संग खुशी मनबैत छथि। बच्चा सँ ल’ कए बूढ़ तक सभ रंग खेलैत छथि। एहि कारण होली के सबसँ आनंददायक पर्व मानल जाएत अछि।

होली सँ एक दिन पहिने होलीका दहन होइत अछि। ई परंपरा बहुत पुरान अछि आ एक धार्मिक कथा सँ जुड़ल अछि। कथा अनुसार हिरण्यकश्यप नामक राजा बहुत घमंडी छल। ओ अपन पुत्र प्रह्लाद के भगवानक पूजा करए सँ रोकैत छल, मुदा प्रह्लाद भगवान विष्णु के सच्चा भक्त छल। राजा अपन बहिन होलिका के कहलक जे प्रह्लाद के आगि मे ल’ कए बैठ जाए। होलिका के वरदान छल जे ओ आगि मे नहि जरी। मुदा भगवानक कृपा सँ प्रह्लाद बचि गेल आ होलिका जलि गेल। एहि घटना सँ ई साबित भेल जे बुराई पर हमेशा अच्छाईक जीत होइत अछि। एहि कारण होलीका दहन क परंपरा शुरू भेल।

मिथिला क्षेत्र मे होलीका दहन बहुत उत्साह सँ मनायल जाएत अछि। गामक लोक सभ मिलि कए लकड़ी जमा करैत छथि आ एक जगह होलीका जारैत छथि। लोक आगि के चारू तरफ घूमि कए पूजा करैत छथि आ अपन परिवारक सुख-शांति लेल प्रार्थना करैत छथि। कतेको लोक आगि के राख घर ल’ जाइत छथि, कारण ओहि के शुभ मानल जाएत अछि।

होलीक मुख्य दिन रंग खेलबाक दिन होइत अछि। एहि दिन सबेरे सँ लोक एक-दोसराक घर जा कए रंग लगबैत छथि। बच्चा सभ पिचकारी सँ रंगीन पानी फेकैत छथि। कियो अबीर-गुलाल लगबैत अछि, त कियो पानी वाला रंग सँ खेलैत अछि। चारू तरफ हँसी-खुशीक माहौल बनि जाएत अछि। लोक नाचैत-गाबैत छथि आ एक-दोसराक गले मिलैत छथि।

मिथिला मे होली के “फगुआ” सेहो कहल जाएत अछि। एतय होलीक अवसर पर विशेष फगुआ गीत गायल जाएत अछि। ढोलक, मंजीरा आ झालक आवाज सँ पूरा वातावरण गूँज उठैत अछि। लोक टोली बना कए गाम मे घूमैत छथि आ गीत गाबैत छथि। एहि सँ होलीक मजा आ बढ़ि जाएत अछि।

होलीक समय स्वादिष्ट पकवान बनाबए क परंपरा सेहो अछि। घर-घर मे गुजिया, मालपुआ, पूआ, दही-बड़ा, खाजा आदि बनायल जाएत अछि। परिवारक सभ सदस्य मिलि कए खाना बनबैत छथि। लोक अपन पड़ोसी आ रिश्तेदार के घर जा कए पकवान खाइत छथि आ शुभकामना दैत छथि। एहि सँ आपसी प्रेम बढ़ैत अछि।

होली सामाजिक रूप सँ बहुत महत्वपूर्ण पर्व अछि। ई दिन अमीर-गरीब, छोट-बड़, जात-पात क भेदभाव खत्म भ’ जाएत अछि। सभ लोक एक-दोसराक संग बराबरी सँ रंग खेलैत छथि। ई पर्व समाज मे एकता आ भाईचारा बढ़ाबैत अछि। होली हम सभ के सिखबैत अछि जे हम सभ मिलि-जुलि कए रहब त जीवन खुशहाल रहत।

पहिले के समय मे लोक प्राकृतिक रंग सँ होली खेलैत छल। फूल, हल्दी, चंदन आदि सँ रंग बनावल जाएत छल। मुदा आब बाजार मे रासायनिक रंग मिलैत अछि, जे कतेको बेर त्वचा आ आँख लेल नुकसानदायक होइत अछि। एहि कारण हमरा सभ के सुरक्षित रंगक उपयोग करबाक चाही। प्राकृतिक रंग सँ होली खेलब स्वास्थ्य लेल अच्छा होइत अछि आ पर्यावरण सेहो सुरक्षित रहैत अछि।

होली मनोरंजनक संग-साथ जीवनक शिक्षा सेहो दैत अछि। ई हम सभ के बतबैत अछि जे जीवन मे खुशी बाँटब बहुत जरूरी अछि। जँ हम दूसराक संग प्रेम करब, त समाज मे शांति रहत। पुरान झगड़ा भुला कए नव शुरुआत करबाक संदेश होली दैत अछि। एहि दिन लोक माफी मांगैत छथि आ दूसराके माफ सेहो करैत छथि।

मिथिला संस्कृति मे होलीक विशेष पहचान अछि। एतय लोकगीत, नाच-गान आ परंपरा बहुत मजबूत अछि। होलीक समय गाम मे अलग उत्साह देखए के मिलैत अछि। शहर मे सेहो लोक खुशी सँ होली मनबैत छथि, मुदा गामक होलीक मजा अलग होइत अछि। एतय अपनापन आ मिलनसारिता अधिक देखल जाएत अछि।

आधुनिक समय मे होली मनाबए क तरीका बदलि रहल अछि। कतेको लोक डीजे संगीत पर नाचैत छथि, रंग पार्टी करैत छथि आ आधुनिक तरीका सँ होली मनबैत छथि। मुदा पारंपरिक होलीक महत्व अभी सेहो कायम अछि। हमरा सभ के चाही जे आधुनिकता अपनाबैत समय अपन परंपरा के नहि भुली।

होली बच्चा लेल विशेष खुशीक दिन होइत अछि। बच्चा सभ नया कपड़ा पहिरैत छथि, पिचकारी खरीदैत छथि आ दोस्त संग खूब मस्ती करैत छथि। ओ सभ एहि दिनक इंतजार बहुत दिन सँ करैत छथि। बच्चा के खुशी देख कए बड़का लोक सेहो खुश भ’ जाएत छथि।

अंत मे कहल जा सकैत अछि जे होली केवल रंग खेलबाक पर्व नहि अछि, बल्कि प्रेम, खुशी, एकता आ भाईचारा के पर्व अछि। ई पर्व हम सभ के एक-दोसराक नजदीक लाबैत अछि आ जीवन मे खुशी भरि दैत अछि। हमरा सभ के चाही जे हम सुरक्षित आ प्रेमपूर्वक होली मनाबी आ दूसराके सेहो खुशी दी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *