Govardhan Puja विधि, महत्व, मुहूर्त और अन्नकूट पूजा पूरी जानकारी

Table of Contents

गोवर्धन पूजा की तैयारी (Govardhan Puja Preparation)

पूजा से पहले कुछ तैयारियाँ आवश्यक होती हैं:

✔ घर की सफाई

✔ पूजा स्थल तैयार करना

✔ गोवर्धन पर्वत का निर्माण

✔ 56 भोग या कम से कम सात प्रकार के प्रसाद

✔ गाय/बछड़े की पूजा की तैयारी


गोवर्धन पूजा में आवश्यक सामग्री (Puja Samagri List)

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आवश्यक सामग्री

  • मिट्टी या गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत

  • फूल-माला

  • दीपक (घी या सरसों का तेल)

  • धूप, कपूर

  • पंचामृत

  • शुद्ध जल

  • रोली, कुमकुम

  • अक्षत

  • तुलसी दल

  • नैवेद्य / भोग

  • खीर, पूड़ी, सब्जी

  • मिठाइयाँ

  • पान, सुपारी

  • शक्कर

  • चौकी

  • लाल/पीला कपड़ा

  • गाय के लिए हरा चारा

  • गोबर के दीपक

  • अगरबत्ती

  • मौली (कलावा)


गोवर्धन पूजा कैसे करें? (Step-by-Step Govardhan Puja Vidhi)

यह सबसे महत्वपूर्ण सेक्शन है।
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1. स्नान और शुद्धि

सुबह स्नान कर घर और पूजा स्थल साफ करें।
पूजा के लिए पूर्व दिशा की ओर मुख रखें।


2. गोवर्धन पर्वत का निर्माण

गोवर्धन पूजा की असली पहचान गोबर से बनाया गया पर्वत है।

कैसे बनाएं?

✔ एक बड़े स्थान पर गोबर से छोटा पहाड़ बनाएं
✔ उसमें

  • गाय,

  • बछड़ा,

  • नाग

  • वृक्ष

  • तालाब

  • गोप-गोपियां
    की आकृतियाँ बनाएं।

✔ गोवर्धन पर पानी छिड़कें
✔ फूल और रोली से सजाएँ


3. भगवान कृष्ण का आह्वान

श्रीकृष्ण की मूर्ति या फोटो को थाली में रखकर पूजा स्थल पर बैठाएँ।


4. दीप-धूप, जल और पंचामृत अर्पण

✔ धूप करें
✔ जल अर्पित करें
✔ पंचामृत से अभिषेक करें
✔ तिलक लगाएं


5. गाय और बछड़े की पूजा

यदि घर में गाय हैं तो—

✔ गाय को स्नान कराएँ
✔ उसके सींग-पूँछ पर हल्दी-कुमकुम लगाएँ
✔ माला पहनाएँ
✔ घास या गुड़ खिलाएँ

यदि गाय घर में नहीं है, तो तस्वीर पर पूजा कर सकते हैं।


6. गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा

परिक्रमा इस पूजा का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है।

  • कम से कम 7 बार

  • सामान्यतः 108 बार भी की जाती है

  • हर परिक्रमा में “श्री गोवर्धन महाराज की जय” बोलना चाहिए


7. अन्नकूट भोग लगाना

इस दिन 56 भोग का महत्व है।
लेकिन आपके घर में उपलब्ध भोजन से भी अन्नकूट बनाया जा सकता है।

भोग में यह चीजें रखें:

✔ खीर
✔ पनीर/सब्जी
✔ पूरी
✔ दाल
✔ चावल
✔ कचौड़ी
✔ मिठाई
✔ फल

भोग को गोवर्धन पर्वत के सामने रखें।


8. आरती और मंत्र

गोवर्धन पूजा का मुख्य मंत्र:

“गोवर्धनधराय नमः”
“श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी”

कृष्ण आरती:

“जय कन्हैया लाल की, जय कन्हैया लाल की”


9. परिवार सहित प्रसाद ग्रहण

पूजा के बाद सभी सदस्य मिलकर प्रसाद ग्रहण करें और आशीर्वाद लें।


गोवर्धन पूजा में क्या न करें?

  • शाम के समय पूजा नहीं करें

  • गोबर पर्वत को पैर न लगाएँ

  • अशुद्ध अवस्था में पूजा न करें

  • मांस-मदिरा का सेवन न करें

  • झगड़ा, शोर-गुल न करें


गोवर्धन पूजा कथा (Govardhan Puja Story)

एक बार इंद्र देव के अहंकार के कारण ब्रजवासियों पर भारी वर्षा हुई।
लोग डर गए और श्रीकृष्ण से सहायता मांगी।
कृष्ण ने सभी को गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण दी और 7 दिन तक पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाए रखा।
इंद्र देव का अभिमान टूटा और ब्रजवासियों की रक्षा हुई।
उसी दिन को गोवर्धन पूजा के रूप में मनाया जाता है।


गोवर्धन पूजा के लाभ (Benefits)

✔ घर में समृद्धि आती है
✔ गौ-धन की वृद्धि होती है
✔ परिवार में कलह खत्म होती है
✔ रोग-दोष दूर होते हैं
✔ भाग्य और धन की वृद्धि होती है
✔ घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है

निष्कर्ष

गोवर्धन पूजा सिर्फ धार्मिक रीति-रिवाज नहीं है बल्कि यह प्रकृति, गाय-धन, भगवान कृष्ण और संरक्षण का संदेश देने वाला उत्सव है।
अगर इसे सही विधि और भक्ति के साथ किया जाए तो यह जीवन में समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा भर देता है।

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