प्रस्तावना
बिहार की राजनीति हमेशा से पूरे देश में चर्चा का विषय रही है। यहाँ के चुनाव न सिर्फ़ राज्य की दिशा तय करते हैं बल्कि यह भी संकेत देते हैं कि देश की राजनीतिक हवा किस ओर बह रही है। साल 2025 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से सबसे बड़ा सवाल यही है —
👉 क्या NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) एक बार फिर बिहार की सत्ता में वापसी कर पाएगा?
या फिर विपक्षी महागठबंधन (RJD, कांग्रेस, वाम दल आदि) इस बार जनादेश को अपने पक्ष में मोड़ लेगा?
🔹 NDA की मौजूदा स्थिति
वर्तमान समय में बिहार में NDA के प्रमुख घटक दल हैं —
भारतीय जनता पार्टी (BJP)
जनता दल (यूनाइटेड) – JDU
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास)
हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा)
हाल के कई एग्ज़िट पोल और जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार NDA इस बार भी मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है।
कई सर्वे में NDA को 130 से 167 सीटों तक मिलने का अनुमान जताया गया है, जबकि बहुमत के लिए 122 सीटों की आवश्यकता होती है।
इसका मतलब है कि बिहार की जनता में NDA की पकड़ अब भी बरकरार है, ख़ासकर ग्रामीण और पिछड़े वर्गों में।
🔹 NDA के पक्ष में जाने वाले प्रमुख कारण
1. मोदी फैक्टर और केंद्र की लोकप्रियता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता अब भी बिहार के मतदाताओं के बीच बहुत ऊँची है। उनके नाम पर वोट करने वाली बड़ी संख्या विशेषकर पहली बार वोट करने वाली युवा पीढ़ी में दिखाई देती है।
2. जातीय समीकरणों में बढ़त
NDA ने पिछड़े, अतिपिछड़े (EBC), और अनुसूचित जाति (SC) समुदायों में अपनी स्थिति को मज़बूत किया है।
BJP और JDU ने इन समुदायों के नेताओं को टिकट देकर संतुलन साधने की कोशिश की है।
3. विकास और बुनियादी ढांचा कार्य
राज्य में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में किए गए विकास कार्य NDA के लिए एक मज़बूत मुद्दा बन रहे हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का “सात निश्चय” कार्यक्रम अब भी ग्रामीण मतदाताओं के बीच लोकप्रिय है।
4. विपक्ष की अंदरूनी खींचतान
महागठबंधन (RJD, कांग्रेस, वाम दल) में उम्मीदवारों के चयन को लेकर कई विवाद सामने आए हैं।
इससे जनता के बीच भ्रम की स्थिति बनी है और NDA को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।
🔹 विपक्ष के पक्ष में परिस्थितियाँ
1. बेरोज़गारी और महंगाई
बिहार में युवाओं के बीच सबसे बड़ा मुद्दा बेरोज़गारी है।
विपक्ष इसे अपना सबसे बड़ा हथियार बनाकर चुनावी मैदान में उतरा है।
महंगाई और नौकरी की कमी को लेकर जनता के असंतोष को महागठबंधन ने भुनाने की कोशिश की है।
2. एंटी-इंकम्बेंसी (विरोध की लहर)
कई मतदाता मानते हैं कि नीतीश कुमार सरकार बहुत लंबे समय से सत्ता में है और अब बदलाव की ज़रूरत है।
यह भावनात्मक लहर अगर बड़ी संख्या में फैली, तो NDA को नुकसान हो सकता है।
3. तेजस्वी यादव का युवाओं पर असर
RJD नेता तेजस्वी यादव युवाओं के बीच अपनी पकड़ बनाए हुए हैं।
उनकी रैलियों में बड़ी संख्या में नौजवान दिखाई दे रहे हैं जो “नए बिहार” की बात कर रहे हैं।
🔹 चुनावी समीकरण और अनुमान
एग्ज़िट पोल्स और सर्वे के आधार पर स्थिति फिलहाल इस प्रकार दिख रही है:
| गठबंधन | अनुमानित सीटें | बहुमत से स्थिति |
|---|---|---|
| NDA | 130 – 167 | मज़बूत |
| महागठबंधन (RJD, कांग्रेस आदि) | 90 – 110 | पीछे |
| अन्य दल (AIMIM, निर्दलीय आदि) | 10 – 15 | निर्णायक |
हालांकि यह केवल अनुमान हैं। अंतिम निर्णय मतगणना के दिन ही स्पष्ट होगा।
🔹 प्रमुख मुद्दे जो परिणाम तय करेंगे
रोज़गार सृजन और पलायन की समस्या
बिहार से हर साल लाखों युवा रोज़गार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते हैं। इस समस्या का स्थायी समाधान कौन लाएगा, यह एक बड़ा सवाल है।कानून-व्यवस्था
“जंगलराज बनाम सुशासन” का मुद्दा हर चुनाव की तरह इस बार भी चर्चा में है।
NDA ने कानून-व्यवस्था में सुधार को अपनी उपलब्धि बताया है, जबकि विपक्ष ने इसे “दावा मात्र” कहा है।महिलाओं की सुरक्षा और शिक्षा
नीतीश सरकार के “साइकिल योजना” जैसे कार्यक्रमों ने पहले बड़ी लोकप्रियता हासिल की थी।
अब सवाल यह है कि क्या नई पीढ़ी की महिलाएँ फिर से उसी भरोसे पर वोट देंगी?केंद्र-राज्य तालमेल
केंद्र में NDA सरकार होने का फायदा राज्य को कितना मिला है — यह भी मतदाताओं के लिए एक प्रमुख विचार बिंदु है।
🔹 लोगों का मूड क्या कहता है?
सोशल मीडिया और ज़मीनी रिपोर्ट्स बताती हैं कि जनता का मूड मिश्रित है।
शहरी क्षेत्रों में NDA को समर्थन अधिक दिखाई दे रहा है।
ग्रामीण इलाकों में RJD की पकड़ बरकरार है।
युवा वर्ग दो हिस्सों में बँटा है — एक ओर मोदी-फैक्टर का प्रभाव, दूसरी ओर रोजगार और नई उम्मीदों की चाह।
🔹 विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार की राजनीति में “जाति + विकास” का फार्मूला हमेशा निर्णायक रहा है।
NDA इस फार्मूले को साधने में कामयाब दिख रहा है, जबकि महागठबंधन भावनात्मक मुद्दों पर जनता को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, अगर मतदान प्रतिशत ऊँचा गया तो यह विपक्ष के पक्ष में जा सकता है,
लेकिन कम मतदान NDA के लिए फायदेमंद माना जाएगा।
🔹 निष्कर्ष
अब जबकि मतदान संपन्न हो चुका है और जनता ने अपना फैसला ईवीएम में बंद कर दिया है, सबकी नज़रें 2025 के परिणाम पर टिकी हैं।
एग्ज़िट पोल्स और जनमत सर्वेक्षण भले ही NDA को बढ़त दिखा रहे हों,
लेकिन बिहार की राजनीति हमेशा अप्रत्याशित मोड़ों से भरी रही है।
👉 अगर NDA दोबारा सत्ता में लौटती है, तो यह प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोनों के लिए बड़ी राजनीतिक जीत होगी।
👉 वहीं अगर महागठबंधन वापसी करता है, तो यह बिहार की राजनीति में नई दिशा की शुरुआत होगी।
📰 अंतिम शब्द
“बिहार चुनाव 2025” सिर्फ एक राज्य का चुनाव नहीं है,
यह देश की राजनीति के अगले अध्याय की झलक भी देगा।
जनता किसे चुनती है — विकास, स्थिरता और अनुभव वाली NDA सरकार या परिवर्तन की मांग करने वाला महागठबंधन —
इसका फैसला आने वाले कुछ दिनों में सामने होगा।
फिलहाल इतना तो तय है — बिहार की जनता ने फिर दिखाया है कि लोकतंत्र की असली ताकत उसी के हाथों में है।














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