साल 2025 में बिहार सरकार द्वारा चलाई जा रही ‘अतिक्रमण हटाओ मुहिम’ पूरे राज्य में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। बुलडोजर कार्रवाई उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में पहले सुर्खियाँ बटोर चुकी है, लेकिन अब बिहार में भी सरकारी जमीनों को मुक्त कराने, सड़क चौड़ीकरण, नदी किनारे बसे अवैध निर्माण हटाने, और शहरी विकास योजनाओं के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है।
बिहार में हो रही बुलडोजर कार्रवाई का सबसे बड़ा कारण—
✔ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा
✔ नदियों के किनारे बसे पक्के निर्माण
✔ सड़क परियोजनाओं में अड़चन
✔ रेलवे की जमीन पर बसे बस्तियां
✔ अपराधियों के अवैध निर्माण
सरकार का साफ कहना है कि “अतिक्रमण हटाना जरूरी है, चाहे वह किसी का भी हो।”
2025 की शुरुआत में कार्रवाई इन जिलों में सबसे अधिक देखी गई—
राजधानी में सड़क चौड़ीकरण और गंगा किनारे निर्माण पर कार्रवाई तेज है। कई जगह से अवैध दुकानों, ठेलों और पक्के घरों पर कार्रवाई की गई।
नगर निगम क्षेत्र में 600+ अवैध निर्माण चिन्हित किए गए, जिसमें बाजार क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई हुई।
बोधगया रोड, रेलवे के पास और धार्मिक स्थलों के आसपास अतिक्रमण हटाने पर जोर।
टावर चौक, स्टेशन रोड और गंगा सागर के पास फुटपाथ और सड़क किनारे कब्जों पर बुलडोजर चला।
नदी किनारे बसे अवैध घरों और दुकानों को हटाया गया।
बिहार सरकार के अधिकारियों का कहना है कि—
विकास कार्यों में अतिक्रमण सबसे बड़ी बाधा है।
सड़क चौड़ीकरण के बिना ट्रैफिक समस्या बढ़ती जाएगी।
सरकारी जमीन पर कब्जा अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनता है।
बिहार में स्मार्ट सिटी योजना तभी सफल होगी जब जमीन साफ होगी।
सरकार के मुताबिक कानूनी नोटिस और समय सीमा देकर लोगों को पहले ही अवगत कराया गया था।
सड़कें चौड़ी हो रही हैं
बाजार व्यवस्थित हो रहा है
गंदगी कम हो रही है
अपराधियों के अवैध मॉल और मकान गिराए जा रहे हैं
गरीबों को बसने का विकल्प नहीं दिया
कई जगह बिना नोटिस कार्रवाई हुई
दुकानदारों को बड़ा नुकसान हुआ
कुछ जगह राजनीतिक टार्गेटिंग भी हुई
बुलडोजर राजनीति अब बिहार में भी गर्म है।
विपक्ष का आरोप है कि—
❌ गरीबों पर कार्रवाई, अमीरों पर नहीं
❌ चुनाव से पहले दिखावटी कदम
❌ कई जगह बेघर लोग बढ़े
सत्ताधारी दल जवाब देता है—
✔ कानून सबके लिए समान
✔ विकास कार्यों के लिए जरूरी
✔ नोटिस देकर कार्रवाई
इस मुद्दे पर बिहार की राजनीति उबल रही है।
बुलडोजर कार्रवाई करना आसान नहीं होता। इसके लिए सरकार को—
नोटिस देना
सुनवाई का मौका देना
दस्तावेज़ जांचना
कोर्ट के आदेश लेना
पुलिस सुरक्षा तैनात करना
इन सब नियमों का पालन करना पड़ता है।
कई बार मामले कोर्ट तक भी पहुंच जाते हैं।
निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक हर प्रकार की संपत्तियाँ सूची में हैं।
कई परिवारों के घर गिरने से लोग बेघर हुए।
सड़क के किनारे दुकान लगाने वालों को भारी नुकसान हुआ।
अवैध ठेले हटने से सड़कें साफ हुईं।
कई जिलों में गैंगस्टरों की संपत्तियों पर कार्रवाई हुई।
सड़कें चौड़ी होने से शहरों में ट्रैफिक कम होगा।
सरकारी रिपोर्टों के अनुसार 2025 में शुरू हुआ यह अभियान 2026 तक जारी रह सकता है क्योंकि—
70% से ज्यादा अवैध निर्माण की पहचान अभी बाकी है
नगर निगमों ने लंबी सूची भेजी है
स्मार्ट सिटी और हाइवे प्रोजेक्ट का काम जारी है
रेलवे ने भी जमीन खाली करने का आदेश दिया है
ऐसा अनुमान है कि 2026 में यह अभियान और तेज हो सकता है।
कुछ जिलों में सरकार ने—
✔ शेल्टर होम
✔ अस्थायी रहने की जगह
✔ पुनर्वास योजना
✔ नए बाजार में दुकानें आवंटित करना
जैसे विकल्प दिए हैं, पर यह सभी जगह लागू नहीं हो पाया।
सोशल मीडिया पर यह मुद्दा सबसे ज्यादा वायरल है—
YouTube Shorts
Facebook Reels
X (Twitter)
लोग लगातार वीडियो और फोटो शेयर कर रहे हैं।
साफ-सुथरा शहर
संगठित बाजार
अपराधियों पर कड़ा संदेश
विकास कार्य तेज
गरीबों को विस्थापन
भावनात्मक नुकसान
दुकान व्यवसाय में गिरावट
बिहार में बुलडोजर कार्रवाई 2025 विकास के लिए जरूरी है, लेकिन इसे मानवीय आधार पर भी लागू किया जाना चाहिए।
परिवारों के पुनर्वास, गरीबों को विकल्प और न्यायपूर्ण प्रक्रिया के बिना कार्रवाई विवाद का कारण बन सकती है।