मैथिली समाज में रोष, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
पटना / मधुबनी।
भोजपुरी कलाकार विजय बिहारी द्वारा मैथिली भाषा को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद पूरे मैथिली समाज में आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस मुद्दे पर सामाजिक कार्यकर्ता और कलाकार विक्रम मिश्रा ने कड़ा विरोध जताते हुए तीखा बयान दिया है।
विक्रम मिश्रा ने साफ शब्दों में कहा कि
“किसी भी भाषा को छोटा बताकर कोई बड़ा नहीं बन सकता। मैथिली केवल भाषा नहीं, बल्कि संस्कृति, संस्कार और पहचान है।”
🔴 “रोज़ी-रोटी नहीं चल रही तो भाषा को दोष मत दो” – Vikram Mishra
विक्रम मिश्रा ने कहा कि कुछ भोजपुरी कलाकार आजकल सस्ती लोकप्रियता के लिए विवादित बयान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा:
“अगर किसी का करियर नहीं चल रहा है तो इसका मतलब यह नहीं कि वह किसी भाषा को नीचा दिखाए। मैथिली को छोटा बोलना असल में अपनी असफलता छुपाने जैसा है।”
उन्होंने आगे कहा कि केवल वीडियो पर मिलियन व्यूज़ आ जाना सफलता का पैमाना नहीं होता।
🎭 “व्यूज़ से इज्ज़त नहीं मिलती” – करारा जवाब
विक्रम मिश्रा ने उदाहरण देते हुए कहा:
“आज इंटरनेट पर कई ऐसे वीडियो हैं जिन पर करोड़ों व्यूज़ हैं, लेकिन क्या वही समाज में सम्मान पाते हैं?
सनी लियोन के वीडियो भी मिलियन में जाते हैं, लेकिन क्या वही कला का मानक हैं?”
उन्होंने कहा कि भोजपुरी के नाम पर कुछ कलाकार अश्लीलता परोस रहे हैं, जिससे पूरी भाषा बदनाम हो रही है।
🎼 मैथिली भाषा का गौरवशाली इतिहास
Vikram Mishra ने कहा कि मैथिली:
संविधान से मान्यता प्राप्त भाषा है
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जाती है
मैथिली साहित्य को राष्ट्रीय सम्मान मिला है
मैथिली फिल्मों और कलाकारों को पुरस्कार मिल चुके हैं
जबकि भोजपुरी इंडस्ट्री को अब भी अपनी पहचान के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
❗ “भोजपुरी को बदनाम मत करो”
उन्होंने साफ कहा कि:
“हम भोजपुरी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन भोजपुरी के नाम पर फूहड़ता फैलाना गलत है। मैथिली को नीचा दिखाकर कोई भोजपुरी को ऊंचा नहीं कर सकता।”
🗣️ सोशल मीडिया पर तेज़ हुई बहस
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है।
Maithili समाज से जुड़े लोगों ने विक्रम मिश्रा के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि मैथिली भाषा और संस्कृति का सम्मान किया जाए।
✍️ निष्कर्ष
मैथिली भाषा कोई कमजोर भाषा नहीं है।
यह अपनी गरिमा, साहित्य और इतिहास के बल पर खड़ी है।
किसी भी कलाकार को यह अधिकार नहीं कि वह किसी भाषा या संस्कृति को छोटा बताए।









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