भारत की विविधता में यदि सबसे जीवंत, सबसे सांस्कृतिक और सबसे भावनात्मक शादी की परंपराओं की बात की जाए, तो मिथिला विवाह का नाम सबसे पहले आता है। बिहार और नेपाल के तराई क्षेत्र में फैले मिथिला में शादी सिर्फ एक सामाजिक रस्म नहीं होती, बल्कि यह समाज, परिवार, संस्कृति और भावनाओं का संगम बनकर जीवनभर याद रहती है।
मिथिला की शादी में हर रस्म गहरे अर्थ से जुड़ी होती है—कहीं माता सीता और भगवान राम का आशीर्वाद, कहीं परंपरा में बसी वैदिक शिक्षा, तो कहीं लोकगीतों में समाई भावनाएँ।
1. मिथिला विवाह: परंपरा और आध्यात्मिकता का संगम
मिथिला की पहचान दुनिया में विद्या, संस्कृति और मर्यादा से की जाती है। माँ जानकी (सीता) की जन्मभूमि होने के कारण यहां विवाह को “देवी के आशीर्वाद” का प्रतीक माना जाता है।
मिथिला की शादी में हर कदम पर यह अनुभूति होती है कि यह केवल एक समारोह नहीं बल्कि दो परिवारों और दो संस्कृतियों का पवित्र मिलन है।
शादी में गाये जाने वाले गीत, रसोई में बनता भोजन, दुल्हन की पारंपरिक पोशाक, दूल्हे का स्वागत—सबमें एक ऐसी मिठास है, जो सिर्फ मिथिला में ही देखने को मिलती है।
2. मिथिला की शादी की खासियतें
मिथिला विवाह की कुछ सबसे विशिष्ट विशेषताएँ:
पूरी शादी वैदिक परंपराओं पर आधारित होती है।
लोकगीत (मंगलगीत, विदाई गीत, सोहर, सुहाग) मुख्य आकर्षण होते हैं।
गौना की परंपरा आज भी कई जगह देखी जाती है।
पान, मखाना, दही-चूड़ा, घी, सत्तू, तिल-लड्डू, ठकुवा का विशेष उपयोग।
महिलाओं द्वारा अरिपन (रंगोली) बनाना शुभ माना जाता है।
मधुबनी कला से सजी परत दर परत खूबसूरत सजावट।
3. मिथिला विवाह के मुख्य चरण
मिथिला विवाह कई महत्वपूर्ण चरणों से गुजरता है। हर चरण का अपना खास महत्व है।
(1) जीविका (परिचय) — कुंडली और परिवार का मिलान
सबसे पहले दोनों परिवार आपस में मिलकर जाति, गोत्र, कुल, ग्रह-नक्षत्र, शिक्षित परिवार आदि का मिलान करते हैं।
रिश्ता पक्का होने से पहले दोनों परिवारों की परंपरागत बैठकी होती है, जिसे “जाजा-गछ्छा” कहा जाता है।
(2) तय-तिथि एवं शुभ-अवसर
कुंडली मिलान होने के बाद पुरोहित द्वारा शादी की तिथि एवं शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। इसे तिथि-निश्चय कहा जाता है।
मिथिला शादी की परंपरा 2026 में लोकगीतों का खास महत्व है…
4. मिथिला विवाह की मुख्य रस्में
अब जानते हैं मिथिला की उन रस्मों को जो विवाह को विशिष्ट और अत्यंत सांस्कृतिक बनाती हैं।
(1) सगुन (सगाई)
मिथिला में सगाई को “सगुन” कहा जाता है।
इसमें:
दुल्हन पक्ष से दूल्हे को
दूल्हे पक्ष से दुल्हन को
पान, सुपाड़ी, धन, कपड़ा, मिठाई, मखाना आदि दिया जाता है।
यह शादी की आधिकारिक शुरुआत होती है।
(2) मटकोड़
शादी से कुछ दिन पहले दुल्हन और दूल्हे के घर पर मटकोड़ होता है।
महिलाएँ गीत गाते हुए मिट्टी लाती हैं और आँगन में उसका छोटा मढ़ा बनाती हैं।
इससे शादी के शुभकार्य की शुरुआत मानी जाती है।
(3) हल्दी (माइती से हल्दी)
यह मिथिला की सबसे सुंदर रस्मों में से एक है।
दुल्हन के मायके से हल्दी आती है।
उसे दुल्हन/दूल्हे के शरीर पर लगाकर पूजा होती है।
घर की सभी महिलाएँ मंगलगीत गाती हैं।
हल्दी लगाने का अर्थ—शरीर की शुद्धि और सौभाग्य की कामना।
(4) बारात का स्वागत (बरैात-आगमन)
मिथिला में बारात का स्वागत अत्यंत सम्मानपूर्वक किया जाता है।
अरिपन (मधुबनी कला जैसे चित्र) बनाकर दूल्हे का स्वागत किया जाता है।
महिलाएँ “सुआग गीत” गाते हुए दूल्हे को मंडप तक ले जाती हैं।
(5) मधुपर्क
यह मिथिला की खास रस्म है।
वर को:
दूध
दही
मधु (शहद)
घी
शुद्ध जल
से पूजा जाता है।
यह स्वागत तथा सम्मान का प्रतीक है।
आज हम मिथिला शादी की परंपरा 2026 की सबसे महत्वपूर्ण रीति-रिवाजों को समझेंगे…
(6) कन्यादान
माता-पिता अपने हाथों से कन्या का हाथ दूल्हे के हाथ में देते हैं।
मिथिला में इसे अत्यंत पवित्र और भावनात्मक माना जाता है।
(7) पाणिग्रहण एवं सप्तपदी
दूल्हा दुल्हन के हाथ को पकड़कर अग्नि की साक्षी में वचन लेता है।
सात कदम लेकर विवाह को पूर्ण किया जाता है।
(8) विदाई (प्रस्थान)
मिथिला की विदाई रस्में अत्यंत भावनात्मक होती हैं।
“विदेश-गीत”
“बिदाई सोहर”
“मायकु घर छोड़ब”
जैसे गीत महिलाओं द्वारा गाए जाते हैं।
(9) कोहबर एवं रंगोली दर्शन
विवाह के बाद दुल्हन दूल्हे को घर में बने मधुबनी पेंटिंग वाले कोहबर कक्ष दिखाती है।
यह रस्म मिथिला की कला का सबसे सुंदर हिस्सा मानी जाती है।
5. मैथिल लोकगीत: विवाह का हृदय
मिथिला शादी गीतों के बिना अधूरी है।
हर रस्म पर अलग गीत गाए जाते हैं:
✔ मंगलगीत — हल्दी, सगुन, पूजा में
✔ सुहाग गीत — दुल्हन को सुहाग का आशीर्वाद
✔ विदाई गीत — ममता और भावनाओं से भरे
✔ बारात स्वागत गीत — वर के सम्मान के लिए
✔ गौना गीत — विदाई से पहले गाए जाते हैं
इन गीतों में माँ सीता का वंदन, शिव और पार्वती का आशीर्वाद और परिवार की खुशियाँ शामिल होती हैं।
6. मिथिला विवाह की वेशभूषा
दुल्हन
लाल/पीली परंपरागत साड़ी
पैजनी, चूड़ा, टिकुली, नथुनी
मधुबनी आर्ट से सजा दुल्हन मेकअप
दूल्हा
धोती/कुर्ता
पगड़ी
कढ़ाईदार दुपट्टा
7. मिथिला के पारंपरिक भोजन
शादी में बनते विशेष व्यंजन:
मखाना की खीर
पान-पूड़ी
तिलकुट
ठकुआ
दही-चूड़ा
मालपुआ
घी-भात
सत्तू का परांठा
इन व्यंजनों से मिथिला की पहचान झलकती है।
8. आधुनिकता के बावजूद परंपरा मजबूत
आज के समय में भी मिथिला विवाह अपने असली स्वरूप में कायम है।
सजावट भले आधुनिक हो गई हो, लेकिन रस्में, गीत, परंपराएँ आज भी उतनी ही पवित्र हैं।
मिथिला शादी की परंपरा 2026 में होने वाली सभी रस्में
9. मिथिला संस्कृति को बढ़ावा देने वाले कलाकार
मिथिला के गीत, संस्कृति और परंपरा को नए रूप में प्रस्तुत करने के लिए कई कलाकार लगातार कार्य कर रहे हैं।
इन्हीं में एक आकर्षक योगदान है —
“Maithili Vivah Geet”
Music Director: Vipin Mishra
Singer: Indu Sonali
Acting: Vikram Mishra
Producer: Ashish Mishra
यह गीत मिथिला शादी की भावनाएँ, रस्में और सांस्कृतिक सौंदर्य को अत्यंत सुंदर तरीके से प्रस्तुत करता है।
निष्कर्ष
मिथिला विवाह सिर्फ दो व्यक्तियों का संबंध नहीं, बल्कि दो परिवारों, दो संस्कृतियों और दो पीढ़ियों का पवित्र मिलन है।
यह परंपरा, संस्कार, गीत, भावनाएँ और सांस्कृतिक गौरव को एक साथ जोड़ती है।
मिथिला की शादी जितनी सरल है, उतनी ही भव्य भी—यही इसे दुनिया की सबसे सुंदर विवाह परंपराओं में खास बनाता है।
















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